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कलेक्टर भोपाल के सामने गायब थे वही पत्रकारों से भी नहीं मिलते हैं जेपी चिकित्सा के सिविल सर्जन

भोपाल. राजधानी के जेपी चिकित्सालय में इलाज कराने आए मरीज एवं उनके परिजन कई कई घंटों तक डॉक्टरों को तलाशते रहते हैं दो- दो तीन- तीन घंटों तक भटकते हैं मरीज गंभीर स्थिति में है और डॉक्टर अपनी सीट पर नहीं है ऐसे में परिजन घंटों मशक्कत करने के बाद किसी एक डॉक्टर को दिखा कर इलाज की खानापूर्ति करवा लेते हैं ।

आज सुबह 10:00 बजे राजधानी के जिला कलेक्टर आशीष सिंह जब जेपी चिकित्सालय पहुंचे तब पाया रजिस्टर में ड्यूटी 95 डॉक्टरों की है जिसमें 20 गायब थे इतना ही नहीं सिविल सर्जन डाँ. राकेश श्रीवास्तव भी अपनी सीट पर से गायब थे सैकड़ों की संख्या में लाइन लगा कर कतार में खडी़ महिलाऐ बेहाल देखी गई और पुरुष गर्मी में बेचैन खड़े डॉक्टर साहब का इंतजार कर रहे थे और डॉक्टर साहब गायब थे।

ऐसे हालात में राजधानी के पत्रकार भी अपने परिवार का इलाज करवाने के लिए लाइन लगाए खड़े थे जेपी चिकित्सालय में बने प्राइवेट वार्ड जिसमें पत्रकार एवं उनके परिवार का निशुल्क उपचार किया जाना रहता है इसी सिलसिले में राजधानी के एक पत्रकार अपने परिवार के मेंबर को भर्ती कराने के लिए प्राइवेट वार्ड लेने के लिए सिविल सर्जन डॉक्टर राकेश श्रीवास्तव के केबिन के बाहर करीब पोन घंटे तक खड़े रहे सिविल सर्जन अपनी सीट पर नहीं थे, करीबन 1 घंटे बाद जब सिविल सर्जन श्रीवास्तव अपनी सीट पर आए और कुछ स्टाफ के लोगों से बातचीत करने लगे उनके ऑफिस बॉय के जरिए उनहें दो से तीन बार सूचना भेजी गई लेकिन वह मिलने को तो छोड़िए बात करने को भी तैयार नहीं थे।

ऐसा प्रतीत हो रहा था, जैसे सीएम से मिलना ज्यादा सरल है लेकिन जेपी चिकित्सालय के सिविल सर्जन से मिलना उतना ही मुश्किल है आम जनता जेपी अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ राकेश श्रीवास्तव से मिलने के लिए 1:30 से 2 घंटे लाइन में खड़े होकर इंतजार कर रही है आम जनता के साथ जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों एवं पत्रकारों से मिलने का सिविल सर्जन के पास समय नहीं है इनकी कार्यप्रणाली से आम जनता और समाजसेवी संगठनों के साथ ही पत्रकार जगत में भी आक्रोश व्याप्त है।

जेपी चिकित्सालय मैं जब डॉक्टरों की कार्यप्रणाली में तानाशाही का यह आलम है तो फिर राजधानी के दूरदराज जिलो की कल्पना ही की जा सकती है डॉक्टरों की तानाशाही एवं लापरवाही का जीता जागता सबूत भोपाल के जिला कलेक्टर आशीष सिंह ने खुद वहां पहुंचकर लापरवाही का नजारा देखा अब देखना यह है क्या कलेक्टर साहब सिविल सर्जन के खिलाफ कोई कठोर कार्यवाही करेंगे या आम जनता को इसी प्रकार घंटो – घंटो तक डॉक्टरों का इंतजार करते देखेंगे।

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