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 ICU में मिडिल ऑर्डर, टॉप बल्लेबाज पूरा बर्बाद, अब मान लो दिन लद गए तुम्हारे!

नितिन नाइक, नई दिल्ली: कहा जाता है कि पैसे से क्या कुछ नहीं खरीदा जा सकता है, लेकिन यह पूरा सच नहीं है। क्रिकेट वर्ल्ड का कुबेर बना फिर रहा भारत आज आईने में खुद शर्मिंदगी को देख सकता है। वैश्विक क्रिकेट पर राज करने वाली भारतीय क्रिकेट बोर्ड को अगर पैसे से आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप लेना होता तो कोई कमी नहीं होती, लेकिन ऐसा नहीं है। इसे जीतने के लिए मैदान में उतरी टीम इंडिया को ऑस्ट्रेलिया से 209 रनों से हार मिली और अब समय है उसे अपने गिरेबान झांकने का।

खराब टीम सिलेक्शन और अति-रूढ़िवादी स्ट्रेटजी

मुख्य कोच राहुल द्रविड़ टीम सिलेक्शन और स्ट्रेटजी को लेकर अति-रूढ़िवादी रहे हैं। उन्होंने धाकड़ सूरमाओं से भरी बैटिंग और बॉलिंग को अलग-थलग छोड़ दिया। द्रविड़ ने भारत की करारी शिकस्त के बाद कहा- यह 469 का विकेट नहीं था। उन्होंने यह भी कहा- पहले दिन आखिरी सत्र में 157 रन देना निराशाजनक था। इस एक सत्र ने मैच का पासा पलट दिया। मोहम्मद शमी, मोहम्मद सिराज और रविंद्र जडेजा थोड़ा प्रभावी जरूर दिखे, लेकिन यह काम नहीं आया।

अश्विन ही क्यों आसान बलि का बकरा?
टॉप ऑर्डर पूरी तरह फेल रहा तो न्यूजीलैंड के खिलाफ साउथेम्प्टन में डब्ल्यूटीसी फाइनल में हार के लिए अश्विन को बलि का बकरा बनाया गया। एडिलेड में भी टी20 विश्व कप के सेमीफाइनल में इंग्लैंड की करारी हार के बाद कप्तान रोहित शर्मा ने गेंदबाजों को जिम्मेदार ठहराया था। लेकिन वह भूल गए कि भारत 10 ओवर के बाद 2 विकेट पर बमुश्किल 62 रन बना पाया था और कप्तान ने खुद 28 गेंदों में 27 रन की बेहद निराशाजनक पारी खेली थी।

घर के शेरों के मुंह पर करारा तमाचा
श्रेयस अय्यर और हनुमा विहारी को अपनी भूमिका निभाने के लिए पिछले साल श्रीलंका के खिलाफ दो मैचों की घरेलू सीरीज के लिए पुजारा और रहाणे को हटाकर एक मेसेज दिया गया था। इसके बाद द्रविड़ ने रिवर्स ड्राइव करने का फैसला किया। फिर से मिडिल ऑर्डर में पुराने नाम दिखे। घर में रनों का अंबार लगाने वाले बल्लेबाजों के मुंह पर WTC हार करारा तमाचा है। इस पर द्रविड़ यह कहते दिखे कि यह वह टीम है, जिसने ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड में मैच जीते थे। उन्होंने अपने खेल के साथ न्याय नहीं किया।

पुजारा, विराट और रहाणे की बेहद खराब औसत
एक नजर में यह द्रविड़ की सस्ती दलील थी। सच्चाई यह है कि मध्यक्रम कुछ समय से आईसीयू में है। स्टार बल्लेबाज विराट कोहली, जो एक बार फिर ऑफ साइड पर छठे स्टंप की गेंद पर आउट हो गए, उनका औसत WTC इस सीजन में 32.13 का रहा। पुजारा का औसत 32, जबकि वापसी करने वाले रहाणे का औसत 24.64 का रहा। ये बताता है कि टीम के धाकड़ कहे जाने वाले खिलाड़ी अपने प्राइम को पार कर चुके हैं।

दूसरे बल्लेबाजों के आगे कहां टिकते हैं भारतीय बल्लेबाज?
दूसरी ओर, अन्य टीमों को देखेंगे तो पता चलेगा कोहली के कद के बल्लेबाज माने जाने वाले जो रूट का औसत 53.1, स्टीव स्मिथ का 50.08, मार्नस लाबुशाने का 53.8, बाबर आजम का 61.08, जॉनी बेयरस्टो का 51.4 और ट्रैविस हेड का औसत 52.5 है। गावस्कर ने सही आकलन के लिए कोच की आलोचना की। उन्होंने कहा- इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि अन्य खिलाड़ियों का औसत क्या है। हम बात कर रहे हैं भारतीय टीम की। भारतीय खिलाड़ियों का औसत गिर रहा है। क्या कोचिंग का स्तर वह नहीं है जिसकी आपको आवश्यकता है? क्या उन क्षेत्रों के बारे में ज्यादा विश्लेषण नहीं है जहां आप में कमी है? ईमानदारी से सेल्फ रिव्यू करने की जरूरत है।

टैलेंट की कमी नहीं, लेकिन T20 का आकर्षण पड़ रहा भारी

इंडिया-ए में टैलेंट की भरमार है। कई बेहतरीन क्रिकेटर हैं। रणजी ट्रॉफी में कई नए नाम बड़े होकर उभरे, लेकिन पहले से बड़े नामों को महानता का दर्जा प्राप्त है। टीम मैनेजमेंट उनसे आगे देखने की कोशिश ही नहीं कर रहा। योग्य खिलाड़ियों को नजरअंदाज करना और टी-20 फ्रेंचाइजी क्रिकेट की दीवानगी युवा टैलेंट को बर्बाद होने में टाइम नहीं लगाएगी। वेस्टइंडीज दौरे से भारत अगले WTC सीजन का आगाज करेगा तो पता चलेगा कि उसकी सोच कितनी बदली है?

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