हीमोग्लोबिन लेवल 1.2 और शरीर में सिर्फ 4 लीटर खून, पटना के डॉक्टरों ने मौत के मुंह से निकाल ली जिंदगी

पटना: सारण के दिघवारा की रहने वाली सरिता गुप्ता (35) को लगभग एक सप्ताह पहले अस्थानिक टूटने के कारण बेहोशी की हालत में महावीर वात्सल्य में भर्ती कराया गया था, क्योंकि गंभीर रक्त हानि के कारण उनका हीमोग्लोबिन काउंट 1.2 प्रतिशत तक कम हो गया था। डॉक्टरों ने 30 यूनिट रक्त और घटक चढ़ाए और उसकी जान बचाई। वात्सल्य ब्लड बैंक प्रभारी डॉ एस कौशलेंद्र ने कहा ‘हमारे पास आवश्यक खून और अन्य घटक थे, इससे हम उसकी जान बचाने में कामयाब हुए।’ सरिता को जब अस्पताल लाया गया था तो उसकी हालत काफी बिगड़ चुकी थी।
हीमोग्लोबिन लेवल 1.2 और शरीर में सिर्फ 4 लीटर खून
वात्सल्य के डॉक्टरों ने पाया कि महिला को एक्टोपिक गर्भावस्था थी जो बड़ी हो गई थी और जिसके बाद उसकी फैलोपियन ट्यूब फट गई थी। फैलोपियन ट्यूब के फटने के बाद, उसके पेट में लगभग तीन से चार लीटर खून जमा पाया गया, जिससे उसकी जान बचाने के लिए तत्काल सर्जरी की आवश्यकता पड़ी। अस्पताल के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की प्रमुख डॉ. अनामिका पांडे ने डॉ. स्वप्ना, डॉ. पुलक तोष और डॉ. गीता की टीम के साथ सर्जरी की, जो एक घंटे तक चली, ताकि दरार को ठीक किया जा सके।
पटना के डॉक्टरों ने मौत के मुंह से खींच ली जिंदगी
डॉक्टर अनामिका पांडे ने बताया कि ‘हमने ऑपरेशन टेबल पर सरिता को 30 यूनिट खून और अन्य रक्त घटक चढ़ाए। इसमें पीआरबीसी की 8 यूनिट, एफएफपी की 10 यूनिट, क्रायो की 6 यूनिट और प्लेटलेट्स की 6 यूनिट शामिल थीं।’ सर्जरी के बाद महिला दो दिनों तक वेंटिलेटर सपोर्ट पर थी लेकिन अब वह ठीक है और गुरुवार को उसे छुट्टी दे दी जाएगी। सरिता के पति अखिलेश्वर गुप्ता ने कहा कि उनकी पत्नी को नयी जिंदगी मिल गयी है। उनके मुताबिक ‘सारण के कई अस्पतालों में इलाज कराने के बाद हमने उम्मीद छोड़ दी थी। हम हताशा के कारण यहां आए लेकिन हम भगवान के आभारी हैं जो इन डॉक्टरों ने मेरी पत्नी की जिंदगी बचा ली।’



