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मणिपुर आंदोलन के केंद्र में क्यों हैं महिलाएं? 12 आतंकियों की रिहाई से फिर सामने आई बगावत

इंफाल: मणिपुर में बीते महीने से चले आ रहे हिंसक आंदोलन के केंद्र में महिलाओं की मौजूदगी बड़े पैमाने पर देखी गई है। बीते शनिवार 12 आतंकियों को छुड़ाने की घटना में भी देखा गया कि सैंकड़ो हजारों की संख्या में मौजूद महिलाओं ने सेना अधिकारियों को आतंकियों की रिहाई के लिए विवश कर दिया। हथियारों से लैस आतंकियों को खदेड़ने के लिए सेना ने अभियान चलाया था, जिसमें खलल डालते हुए मणिपुर में महिलाओं का समूह विरोध करने के लिए सड़कों पर उतर आया। हिंसक राज्य में केंद्र सरकार की लगातार कोशिशों के बाद भी इस तरह की घटना बड़ी बगावत को जन्म देती दिख रही है। मणिपुर हिंसा को लेकर लेक दिल्ली में भी प्रदर्शन हुए थे, इस दौरान भी खास बात थी कि महिलाओं के नेतृत्व में ही यह देखने को मिला।

बाजार से लेकर लड़ाई तक महिलाओं ने लिया मोर्चा

मणिपुर में बाजार से लेकर लड़ाई लड़ने तक महिलाओं की हिस्सेदारी सबसे आगे रही है। दुनिया की सबसे बड़ी बाजार कही जाने वाली इंफाल में इमा कैथेल पर भी महिलाओं का ही कब्जा देखने को मिलता है, जहां टूरिस्ट को पसंद आने वाली मार्केट में करीब 3 से 5 हजार महिलाएं अपने उत्पाद बेचते हुए मिलेंगी। इसके अलावा ब्रिटिश राज में अंग्रेजी हुकूमत को भी मणिपुर की महिलाओं के आगे घुटने टेकने पड़े थे। जब पुरुषों के 30 दिन मजदूरी के बाद 10 दिन फ्री मजदूरी का नियम लागू किया गया था। महिलाओं के विरोध के बाद फिर यह नियम रोका गया था। इसके अलावा राज्य के बाहर चावल निर्यात से लेकर ड्रग्स पर रोक लगाने तक हर जगह महिलाओं की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा रही है।

जिद पर आमादा हो गई महिलाओं की भीड़

सुरक्षा बलों ने शनिवार शाम को मणिपुर स्थित उग्रवादी समूह कांगलेई यावोल कन्ना लुप (केवाईकेएल) के 12 सदस्यों को पकड़ने के लिए एक अभियान चलाया था। लेकिन महिलाओं के नेतृत्व में 1,200-1,500 की भीड़ इस बात पर आमादा हो गई कि वे आतंकियों को छुड़ाकर ही मानेंगे। सबसे बड़ी परेशान करने वाली यह है कि इन 12 आतंकियों में वो मास्टरमाइंड सांबा भी शामिल था, जिसने कि साल 2015 में एक बड़े ऑपरेशन को अंजाम देने में अहम भूमिका अदा की थी।

कहीं पछताना न पड़ जाए

मोइरंगथेम तम्बा, उर्फ उत्तम और 11 अन्य सशस्त्र उग्रवादियों की जबरन रिहाई से पैदा हुई बगावत आगे भारी पड़ सकती है। कोहिमा स्थित रक्षा पीआरओ लेफ्टिनेंट कर्नल अमित शुक्ला ने कहा कि एंड्रो से करीब 6 किमी पूर्व, इथम गांव में सशस्त्र आतंकवादियों की मौजूदगी के बारे में इनपुट मिलने के बाद सुरक्षा बलों ने शुक्रवार सुबह ऑपरेशन शुरू किया था। 12 केवाईकेएल कैडरों को पकड़ने के साथ ही सेना ने इनसे हथियार, गोला-बारूद और अन्य युद्ध उपकरण जब्त किए थे।

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