समर्धा रेंज में बड़ा घोटाला 20 लाख रुपए के आस-पास का जुर्माना।फाईल रेंजर की टेबल तक पहुंची और फिर आज तक गायब।






भोपाल. मामला 3 वर्ष से अधिक का हैं भोपाल हाईवे नया बायपास रोड 11मील से फंदा खजुरी सड़क तक का हैं बायपास रोड का निर्माण कार्य एम पी आर डी सी ने किया था। हाईवे रोड के दोनों तरफ प्लानटेंशन किया गया था हरे भरे पेड़ भी लगाएं गये थे,इस सारे प्लानटेंशन निर्माण एवं पोंधे लगानें का कार्य वन विभाग के समर्धा रेंज के द्वारा कराया गया था जिसमें लाखों रुपया खर्च किया गया था । हरे भरे पेड़-पौधे की पानी सिंचाई में हजारों रुपए का पानी टेंकरो के द्वारा सींची गया था। इस सारे प्लानटेंशन की देख रेख एवं सुरक्षा वन विभाग को ही करनी थी मगर अफसोस वन विभाग का समर्धा रेंज अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा सका और न ही पेड़-पौधे की सुरक्षा कर सका। जब यह हाईवे बायपास रोड बन कर तैयार हो गया तो फिर इस के दोनों तरफ मकान निर्माण कार्य शुरू हो गये बड़े बड़े वेयरहाउस बनने लगे उस क्षेत्र के बिल्ड़र भी पीछे नहीं रहे बहुत सारे बिल्डरों ने किसानों से जमीनें लेनी शुरू कर दी कुछ किसानों ने तो खुद ही प्लाटिंग करना शुरू कर दी। प्लाटिंग भी ऐसी हुई जिसमें टीएनसीपी एवं रेरा की कोई अनुमति नहीं थी जिसे शासन प्रशासन ने अवैध प्लाटिंग मना, खैर राजनेतिक संरक्षण होने के कारण अवैध प्लाटिंग का कारोबार जोरों – शोरों से चलनें लगा समय समय पर भोपाल कलेक्टर ने इस अवैध प्लाटिंग पर कानूनी कार्यवाही भी कि बाबजूद इसके आज तक यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा हैं। बिल्डरों के हौंसले इतने बुलंद हो गए कि उन्होंने वन विभाग के द्वारा लगाए गए पौधे एवं प्लानटेंशन को नष्ट करना शुरू कर दिया इतना ही नहीं बिल्डरों ने अपने-अपने प्रोजेक्ट पर आने जाने के लिए मुख्य सड़कें भी बना ली उन्हें एमपीआरडीसी एवं वन विभाग से किसी भी प्रकार की अनुमति लेने की जरूरत नहीं समझी यहां ज्ञात कराते चलें हाईवे रोड पर दोनों तरफ 70से100 तक की भूमि एमपीआरडीसी की हैं। ऊपर से वन विभाग से बिना अनुमति लिए हरे-भरें पेड़ तो कांटे ही साथ में तार कांट दिये सीमेंट के खंबे तक उखाड़ कर ले गए।जब यह मामला मीडिया ने उठाया तो वन विभाग के अधिकारीयों ने संज्ञान में लेकर जांच शुरू करवाईं समर्धा रेंज के पड़रिया बीट के उस समय के डिप्टी रेंजर ने सूची बध्य तरीके से नियमनुसार 12से 13 बिल्डरों पर 20लाख रुपए के आस-पास का जुर्माने की फाइल बना कर समर्धा रेंज के रेंजर की टेबल पर रख दी। 12 जून 2023 से लेकर 2026 तक उस फाइल को रेंजर ने कहां दबा रखा हैं क्यों दबा रखा हैं जो कि जांच विषय हैं, इतना ही नहीं अभी हाल ही में वन विभाग में सभी रेंज के रेंजरों के तबादले भी हुए हैं लेकिन समर्धा रेंज के रेंजर को 4वर्ष से अधिक का समय हो चुका हैं फिर भी जमे हुए हैं आखिर यह किसके चहेते हैं किस की मैहरबानी हैं इन पर जो नियम इन पर लागू नहीं होता इसकी भी बारिकी से जांच पड़ताल होनी चाहिए। अब देखना हैं पर्यावरण की बहुत बड़ी शुभचिंतक बनाने वाली भाजपा की सरकार कितने कड़े फैसले लेती हैं, समर्धा रेंज में इतने बड़े स्तर पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचा हैं किसे जिम्मेदार मान कर विभागीय कड़ी कार्यवाही करतीं हैं या फिर पर्यावरण का झूठा ड्रामा कर चुपचाप बैठी रहती हैं।