शकुंतला इंटरप्राइजेज में वन विभाग द्वारा गंभीर कार्रवाई क्यों नहीं

ग्राम पंचायत में स्थापित आरा मशीन अन्य जिलों में लकड़ी सप्लाई करने को क्यों नहीं लेता टीपी

भोपाल . वन विभाग भोपाल द्वारा शकुंतला इंटरप्राइजेज नामक आरा मशीन को लेकर गंभीर क्यों नहीं है, ताजा मामला वन मंडल भोपाल का है विगत दिनों वन उड़नदस्ता भोपाल की टीम ने भोपाल जिले की एक पंचायत पिपलिया जाहिर पीर चोपड़ा में छापेमारी की कार्यवाही की गई थी जिसमें सैकड़ों टन स्टाक किया हुआ गीला निलगिरी एवं बबूल की लकड़ी भारी मात्रा में पाई गई थी, जिस में वन विभाग की टीम ने स्टॉक रजिस्टर सारे माल की टीपी एवं अन्य दस्तावेजो की जांच की गई थी एवं कुछ दस्तावेज वन विभाग की टीम अपने साथ गंभीरता से जांच करने के लिए ले गई थी।

मजे की बात तो यह है कि आखिर वन विभाग ने शकुंतला इंटरप्राइजेज पर गंभीरता से कार्यवाही क्यों नहीं की इस आरा मशीन पर विशेष कृपा करते हुए अधूरे दस्तावेज ही अपने कब्जे में क्यों लिए यहां एक प्रश्नचिन्ह वन विभाग की कार्यवाही पर लगता है।
स्टॉक रजिस्टर टीपी जैसे कई दस्तावेज की जांच तो की गई लेकिन जो विशेष रूप से आरा मशीन के दस्तावेज जांचने थे वह नहीं जाचे गए इस आरा मशीन से जितने भी लकड़ी चीरी जाती है जैसे पटिया, राप्टे, गुटके, लाफे, इसके अलावा कई फैक्ट्रियों के प्रोडक्टों की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाले लकड़ी के बॉक्स जो इस आरा मशीन से अलग-अलग पार्टियों को बेचे जाते हैं उन सभी बेचे गए माल के बिल बुक क्यों नहीं कब्जे में ली गई, क्योंकि शकुंतला इंटरप्राइजेज आरा मशीन ग्राम पंचायत में स्थित है यहां से किसी भी प्रकार की लकड़ी का कोई भी प्रोडक्ट किसी भी तरीके का माल जो निजी व्यापारियों को एवं इंसुलेटर जैसी बड़ी-बड़ी कंपनियों को बेचा जाता है उसके हर बिल पर वन विभाग के टीपी की आवश्यकता होती है वन विभाग के द्वारा जांच पड़ताल के समय इस यूनिट की सारी बिल बुकै भी अपने कब्जे में लेना चाहिए थी ,और हर एक बिल की टीपी की जांच भी बहुत ही बारीकी से होनी चाहिए थी।

इस खबर के माध्यम से वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में यह सारा मामला पहुंचाना चाहते हैं जिससे वरिष्ठ अधिकारी तत्काल इस आरा मशीन की जांच बड़े ही गंभीरता दिखाते हुए बारीकी से कराई जा सके।
सूत्रों ने जानकारी देते हुए बतलाया है शकुंतला इंटरप्राइजेज आरा मशीन के संचालक कि और भी 4 फॉर्म है जो अलग-अलग नाम से हैं जिनके सभी मेंबर एक ही परिवार से संबंध रखते हैं यह भी एक जांच का विषय है, इन चारों यूनिटों मैं कितनी लकड़ी स्टॉक की गई है इन सभी फार्मो के स्टॉक रजिस्टर सारे माल की टीपी कहां और किसको किस तरह का प्रोडक्ट बेचा गया एक जिले से दूसरे जिले में बैचे हुए माल की टीपी एवं बिल जांच किए जाने चाहिए इनके सभी यूनिटों के बैचे एवं खरीदने के सभी बिलों की बारीकी से जांच होनी चाहिए जिसमें यह भी देखा जाए कि सारे जीएसटी भरे हुए बिल हैं या कच्चे ।



