MadhyaPradesh

20 मीटर जमीन के नीचे दौड़ेगी मेट्रो ट्रेन, आरा मशीन से सिंधी कालोनी तक बनेगी दो किमी टनल

भोपाल। मेट्रो परियोजना के प्रथम चरण में एम्स से करोंद तक 16.8 किलोमीटर लंबे आरेंज मार्ग का निर्माण होगा। इसमें करीब 14 किलोमीटर का मार्ग एलिवेटेड होगा, जबकि आरा मशीन क्षेत्र के पास से सिंधी कालोनी तक का मार्ग भूमिगत होगा। इसके लिए जमीन के 20 मीटर नीचे दो किलोमीटर नीचे टनल बनाई जाएगी। भूमिगत मार्ग में भोपाल रेलवे स्टेशन और नादरा बस स्टैंड के पास दो मेट्रो स्टेशन बनेंगे। इनको इस प्रकार से तैयार किया जाएगा, कि बिना परिसर से बाहर निकले यात्री मेट्रो स्टेशन से सीधे रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड में प्रवेश कर सकेंगे। इसके लिए मेट्रो स्टेशन के आगमन और निर्गम द्वार पर एस्केलेटर भी लगाया जाएगा। जिससे यात्री लगेज के साथ भी आसानी से स्टेशन बदल सकेंगे।

ट्विन टनल बोरिंग मशीन से होगा कार्य

अधिकारियों ने बताया कि भूमिगत मेट्रो ट्रैक तैयार करने के लिए ट्विन टनल बोरिंग मशीन का उपयोग किया जाएगा। यह मशीन जमीन में 20 फीट गहराई पर सुरंग बनाती जाएगी और सीमेंट कांक्रीट के सेगमेंट डालती जाएगी। मशीन कैप्सूल आगे बढ़ता जाएगा। अधिकारियों का दावा है कि सुरंग खोदने के दौरान धरातल पर मौजूद इमारतों में रहने वाले लोगों को निर्माण कार्य चलने का एहसास भी नहीं होगा। इसी तकनीक से पुणे, मुंबई, दिल्ली व कोलकाता में टनल बनाई गई है।

सबसे बड़ी टनल सिंधी कालोनी के पास

भूमिगत मार्ग में 900 मीटर कर्व-टनल (आंशिक मोड़ सुरंग) भी बनाई जाएगी। सबसे बड़ी टनल सिंधी कालोनी के पास बनेगी। एलिवेटेड रूट से अंडरग्राउंड स्टेशन में प्रवेश के लिए 35 डिग्री से मेट्रो का प्रवेश होगा। 125 डिग्री के कोण से मेट्रो भूमिगत स्टेशन से बाहर निकलकर एलिवेटेड रूट पर रवाना होगी।

आग लगने पर नहीं होगा अधिक नुकसान

सुरंग में यदि मेट्रो ट्रेन में आग लग जाती है, तो यात्रियों को दम घुटने से बचाने के उपाय किए जाएंगे। सुरंग में वेंटीलेशन की सुविधा होगी। कमरे के आकार के पंखे लगाए जाएंगे। हर स्टेशन पर ऐसे दो पंखे होंगे। ये पंखे धुंआ बाहर निकाले के अलावा हवा अंदर भी फेंक सकेंगे। इसके साथ ही यात्रियों को आग से बचाने के लिए अन्य इंतजाम भी किए जाएंगे।

आग लगने पर नहीं होगा अधिक नुकसान

सुरंग में यदि मेट्रो ट्रेन में आग लग जाती है, तो यात्रियों को दम घुटने से बचाने के उपाय किए जाएंगे। सुरंग में वेंटीलेशन की सुविधा होगी। कमरे के आकार के पंखे लगाए जाएंगे। हर स्टेशन पर ऐसे दो पंखे होंगे। ये पंखे धुंआ बाहर निकाले के अलावा हवा अंदर भी फेंक सकेंगे। इसके साथ ही यात्रियों को आग से बचाने के लिए अन्य इंतजाम भी किए जाएंगे।

इनका कहना

भूमिगत मेट्रो के लिए सिविल वर्क पातरा पुल से सिंधी कालोनी तक होगा। इसका परीक्षण कर लिया गया है। भूमिगत मेट्रो की वजह से ऊपर बने निर्माणों पर कोई असर नहीं होगा। इसे ब्रिम टेक्नीक के जरिए बनाया जाएगा।

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