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 हरियाणा में सूरजमुखी पर संग्राम छेड़ने वाले किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी कौन?

भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष सरदार गुरनाम सिंह चढ़ूनी किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। 2020-21 में केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ जिन किसान नेताओं ने विरोध का नेतृत्व किया था, उनमें चढ़ूनी एक अहम चेहरा रहे हैं। चढ़ूनी प्रशासन को किसानों के मुद्दे पर चुनौती देते रहे हैं। इस बार सूरजमुखी की कीमतों पर मनोहर लाल खट्टर सरकार से दो-दो हाथ कर रहे हैं।

चढ़ूनी ने सूरजमुखी पर क्यों दी चुनौती?

‘सूरजमुखी का 6400 रुपये भाव है और सरकार उसको 5200 रुपये ले आई है। एक हजार भावांतर मिलेगा। 4 हजार के आसपास बिकेगी। 1200 से 1400 रुपये का नुकसान होगा। सवाल सूरजमुखी का नहीं है, सवाल सभी फसलों के एमएसपी का है। एक के बाद एक इस तरह से करते रहेंगे और हमें तोड़ते रहेंगे। साथियों पुलिस कुछ देर में बल प्रयोग कर सकती है। मेरा हरियाणा और पंजाब के किसान भाइयों, संगठन लोगों और जनता से अनुरोध है कि अगर यह बल प्रयोग करते हैं तो तुरंत सारा हरियाणा जाम हो जाना चाहिए।’ कुछ इस अंदाज में चढ़ूनी ने पुलिस और प्रशासन को चुनौती दी। इसके बाद कुरुक्षेत्र में किसान सड़कों पर आ गए।

दसवीं फेल चढ़ूनी की किसानों में तगड़ी पैठ

हरियाणा के कुरुक्षेत्र में पैदा हुए गुरनाम सिंह चढ़ूनी की उम्र करीब 64 साल है। शाहबाद चढ़ूनी जट्टान गांव में पैदा हुए सरदार गुरनाम सिंह अपने नाम के आगे गांव का नाम चढ़ूनी लगाते हैं। दसवीं में फेल होने के बाद चढ़ूनी खेती-किसानी में जुट गए। 2008 में हरियाणा सरकार के खिलाफ कृषि कर्जमाफी को लेकर उन्होंने आंदोलन का नेतृत्व किया था। 2019 में भी चढ़ूनी ने सूरजमुखी की फसल खरीदने की राज्य सरकार की मांग का विरोध किया था।

​सियासत में ऊंचाई नहीं चढ़ पाए चढ़ूनी

18 दिसंबर 2021 को चढ़ूनी ने संयुक्त संघर्ष पार्टी नाम से अपनी राजनीतिक पार्टी का ऐलान किया। 22 किसान संगठनों के संयुक्त समाज मोर्चा के साथ पंजाब चुनाव में हिस्सा लेने के बावजूद उनकी पार्टी आम आदमी पार्टी की सूनामी में कोई कमाल नहीं दिखा सकी। चुनावी राजनीति में उनका करियर सफल नहीं रहा है। हरियाणा की लाडवा सीट से विधानसभा चुनाव लड़ने पर वह सातवें नंबर पर रहे थे। उनकी जमानत जब्त हो गई थी। गुरनाम की पत्नी बलविंदर कौर ने बतौर आम आदमी पार्टी कैंडिडेट कुरुक्षेत्र लोकसभा का चुनाव लड़ा था। हार के बावजूद बलविंदर को 79 हजार वोट मिले थे।

किसान आंदोलन में बैरिकेड्स तोड़ते हुए पहुंच गए थे दिल्ली

सितंबर 2020 में भी चढ़ूनी ने तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ कुरुक्षेत्र की पिपली अनाज मंडी में किसान महापंचायत बुलाई थी। प्रशासन ने जब महापंचायत की इजाजत नहीं दी तो किसानों ने पिपली चौक जीटी रोड पर जाम लगा दिया था। चढ़ूनी के काफिले को पुलिस ने रोकने की कोशिश की लेकिन वह पिपली तक पहुंच गए थे। इसके बाद किसानों ने पूरे हरियाणा में जाम लगा दिया था। आखिरकार पुलिस प्रशासन ने झुकते हुए किसान महापंचायत की इजाजत दी थी। 26 नवंबर 2020 को भी चढ़ूनी ने कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली कूच का नेतृत्व किया था। अंबाला की मोहड़ा मंडी से बढ़े किसानों को जब पुलिस ने जीटी रोड पर रोकने की कोशिश की तो बैरिकेड्स तोड़कर किसान बढ़ गए थे। करनाल पुलिस के नाके को भी किसानों ने तोड़ दिया था। इसके बाद तमाम बैरिकेड्स तोड़ते हुए किसान दिल्ली बॉर्डर पर पहुंचे और लगातार वहां डेरा डाल दिया था।

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