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हज यात्रा पर प्रत्याशी और बंगाल पंचायत चुनाव में नामांकन, वैध-अवैध पर फंसा पेंच तो HC ने आयोग से मांगा जवाब

कोलकाता: पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव के पांच दिन बचे हैं। पंचायत चुनाव से पहले हिंसा, राजनीति और तमाम उठा-पटक के बीच एक और मामला हाई कोर्ट पहुंच गया है। कोलकाता हाई कोर्ट में दायर याचिका में तृणमूल कांग्रेस के एक प्रत्याशी का नामांकन खारिज करने की मांग की गई है। कहा गया है कि प्रत्याशी विदेश में हैं और ऐसे में उनका नामांकन रद्द किया जाए। याचिका पर हाई कोर्ट ने अब चुनाव आयोग से सवाल किया है कि क्या प्रत्याशी का नामांकन सही है या उसे रद्द किया जाना चाहिए? अब इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को है।

याचिका सीपीआई (एम) की ओर से कोलकाता हाई कोर्ट में दाखिल की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया कि उत्तर 24 परगना जिले के मिनाखान के कुमारजोल से तृणमूल कांग्रेस ग्राम पंचायत उम्मीदवार मोइनुद्दीन गाजी नामांकन के दौरान सऊदी अरब में थे।

याचिका में लगाए यह आरोप

मोइनुद्दीन 4 जून को हज यात्रा पर निकल गए थे। बंगाल में तो क्या वह भारत से बाहर थे इसके बावजूद में उनका नामांकन स्थानीय ब्लॉक विकास कार्यालय ने स्वीकार कर लिया। याचिका में सवाल उठाया गया है कि कोई उम्मीदवार विदेश से अपना नामांकन कैसे दाखिल कर सकता है? जबकि, नामांकन दाखिल करते समय उसकी व्यक्तिगत उपस्थिति जरूरी है।

चुनाव आयोग के अधिकारियों पर आरोप

इस याचिका को स्वीकार कर लिया गया है। इस मामले पर शुक्रवार को कलकत्ता हाई कोर्ट की न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा की एकल पीठ सुनवाई कर सकती है। याचिकाकर्ता ने हज समिति की एक विज्ञप्ति भी पेश की है। जिसमें जिक्र है कि मोइनुद्दीन गाजी 4 जून से सऊदी अरब में हैं और 16 जुलाई तक वहां रहने वाले हैं। याचिकाकर्ता ने सवाल किया है कि विदेश में रहते हुए उनका नामांकन पत्र कैसे जमा किया गया और उसे स्वीकार भी कैसे कर लिया गया।

रिटर्निंग अफसर पर सांठगांठ का आरोप

याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि ऐसा तब तक संभव नहीं है, जब तक संबंधित उम्मीदवार की स्थानीय खंड विकास कार्यालय के साथ-साथ रिटर्निंग अधिकारी से सांठगांठ न हो। इस पर हाई कोर्ट जस्टिस ने भी अचंभा जाहिर किया है। जस्टिस ने कहा, ‘कुछ प्रत्याशियों को चुनाव आयोग बचा रहा है। कई ऐसे लोगों के नामांकन स्वीकार कर लिए गए जो नॉमिनेशन सेंटर नहीं गए। चुनाव अधिकारी क्या कर रहे हैं?’

सरकारी वकील ने दिया कानून का हवाला

हालांकि राज्य काउंसल श्रीसन्या बंदोपाध्याय ने हाई कोर्ट को बताया कि यह जरूरी नहीं है कि नामांकन के समय प्रत्याशी रिटर्निंग ऑफिसर के सामने मौजूद हो। उन्होंने यह दावा पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव ऐक्ट 2023 के सेक्शन 46 के तहत किया। उन्होंने कहा कि कानून कहता है कि उम्मीदवार के प्रस्तावक उनकी जगह पर नामांकन दाखिल कर सकते हैं। कोई भी प्रत्याशी के नॉमिनेशन को चुनौती नहीं दे सकता है। उन्होने यह भी कहा कि बीडीओ को इस मामले में कोई शिकायत नहीं मिली।

बुधवार को ही न्यायमूर्ति सिन्हा ने पश्चिम बंगाल में आगामी पंचायत चुनावों के लिए दो उम्मीदवारों के नामांकन दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ करने के लिए एक खंड विकास अधिकारी के खिलाफ सीबीआई जांच का निर्देश दिया था। न्यायमूर्ति सिन्हा ने यह भी कहा था कि चूंकि आरोप राज्य सरकार के एक अधिकारी के खिलाफ हैं, इस स्थिति में राज्य की जांच एजेंसी से इस मामले की जांच कराना सही नहीं होगा। इस मामले की जांच सीबीआई करेगी। उन्होंने सीबीआई को इस मामले में 7 जुलाई तक विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा है। दूसरी तरफ राज्य सरकार ने आदेश के खिलाफ गुरुवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ का रुख किया।

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