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मोदी की ‘सिक्योरिटी’ लेने के बाद मुकेश सहनी ने छोड़ा नीतीश का बंगला, अब होगा खेला?

पटना: अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले क्या बिहार में फिर कोई बड़ा खेला होने वाला है? लगातार हो रहे सियासी घटनाक्रम से ऐसे सवाल उठे हैं। ताजा मामला विकासशील इंसान पार्टी (VIP) के मुखिया मुकेश सहनी से जुड़ा हुआ है। नीतीश कुमार (Nitish Kumar) सरकार में मंत्री रहे मुकेश सहनी ने पटना में अपना सरकारी बंगला खाली कर दिया है। हाल ही केंद्र सरकार से उन्हें Y प्लस सिक्योरिटी मिली थी। इसी बीच अचानक उनके सरकार बंगला छोड़ने को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई। कहा तो ये भी जा रहा कि मुकेश सहनी (Mukesh Sahni) एक बार फिर बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए का हिस्सा बन सकते हैं।

सहनी ने यहां बनाया नया ठिकाना

बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने सरकारी बंगला छोड़कर अब पटना के कंकड़बाग स्थित पीसी कॉलोनी में नया ठिकाना बनाया है। वो यहां किराये पर रहेंगे। राज्य सरकार की ओर से सिक्योरिटी वापस लिए जाने के बाद करीब दो महीने पहले ही सहनी को केंद्र सरकार की ओर से Y+ सिक्योरिटी मिली। बीजेपी ने इस कदम के जरिए एक तरह से सहनी की ओर अपनी दोस्ती का हाथ बढ़ाया। माना जा रहा वीआईपी चीफ भी एनडीए के साथ जाने की प्लानिंग कर चुके हैं।

VIP चीफ ने इसलिए छोड़ा सरकारी बंगला

मुकेश सहनी के अचानक सरकारी बंगला छोड़ने की कई वजहें मानी जा रहीं। सबसे अहम ये कि अभी तक वो खुलकर नीतीश कुमार के खिलाफ कुछ भी नहीं बोल रहे थे। अब अगर वो बीजेपी खेमे करीब जाते हैं तो नीतीश पर अटैक से पीछे नहीं रहेंगे। जिस तरह से उपेंद्र कुशवाहा, आरसीपी सिंह ने जेडीयू छोड़ने के बाद बिहार के सीएम पर करारा अटैक किया अब सहनी भी इसी अंदाज में नजर आ सकते हैं।

मांझी के बाद सहनी को लेकर सस्पेंस

चर्चा ये भी है कि HAM मुखिया जीतनराम मांझी भी महागठबंधन से दूरी बनाने की रणनीति पर विचार कर रहे हैं। उनकी कुछ महीने पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात भी हुई थी। इधर जेडीयू ने मांझी को मनाने के लिए विजय चौधरी को उनसे बात करने भेजा। हालांकि, ये बातचीत उतनी सफल शायद नहीं रही। ऐसे में मांझी को लेकर अटकलों का दौर तेज है। इसी बीच मुकेश सहनी का नया दांव क्या बड़े खेल का आगाज है, देखना दिलचस्प होगा।

नीतीश कैसे जोड़े रखेंगे अपना कुनबा?

ये पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहा जब नीतीश कुमार 2024 के रण को लेकर देशभर में बीजेपी विरोधी विपक्षी दलों को एकजुट कर रहे हैं। नीतीश जहां विपक्षी एकता पर काम कर रहे हैं, वहीं बिहार में महागठबंधन के साथ नजर आ रहे दल ही दूर होते दिख रहे। अगर मांझी और सहनी बीजेपी के साथ जाते हैं तो ये नीतीश-तेजस्वी दोनों के लिए बड़े झटके से कम नहीं होगा।

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