MadhyaPradesh

छोटे प्लाट पर अधिकतम निर्माण की छूट नहीं मिलने से अवैध निर्माण बढ़ने की आशंका

भोपाल । प्रस्तावित मास्टर प्लान 2031 में छोटे प्लाटों पर अधिकतम निर्माण की अनुमति नहीं देने से एक लाख से अधिक संपत्तिधारकों को नुकसान उठाना पड़ेगा। जबकि लंबे समय से छोटे प्लाटों में अधिकतम निर्माण की अनुमति देने की मांग की जा रही है। यदि सरकार पूर्व में दिए गए सुझावों पर अमल करती तो मास्टर प्लान में विसंगतियां नहीं होतीं। हालांकि एक बार फिर मास्टर प्लान को लेकर दावे-आपत्तियों का आना शुरू हो गया है।

आर्किटेक्ट एवं टाउन प्लानर सुयश कुलश्रेष्ठ ने बताया कि मास्टर प्लान 2005 के अनुसार 15 बाय 30 के छोटे प्लाट पर निर्माण के दौरान भी घर के सामने 10 फीट खाली जगह छोड़ना अनिवार्य है। हालांकि इसका पालन कम ही लोग करते हैं। इसमें संशोधन के लिए आपत्ति भी लगाई गई, लेकिन प्रस्तावित मास्टर प्लान में कोई संशोधन नहीं किया गया। इससे छोटे प्लाटों पर अवैध निर्माण बढ़ेंगे। वहीं वर्टिकल या हाईराइज बिल्डिंग के निर्माण से मौजूदा आधारभूत संरचना पर बोझ बढ़ेगा।

एफएआर बढ़ने से अनियंत्रित होगा विकास

एमपी नगर जैसे व्यावसायिक क्षेत्रों में पहले से ही लोग अधिक एफएआर का इस्तेमाल कर रहे हैं। उदाहरण के लिए 2400 वर्गफीट के प्लाट पर 20 लोग रह सकते हैं, लेकिन इतने बड़े भूखंड में होटल और हास्टल संचालित हो रहे हैं। इनमें 80 से 100 लोग रहते हैं। जबकि एमपी नगर में जो पानी और सीवेज की पाइप लाइन बिछाई गई है, वो 30 वर्ष पहले बिछाई गई थी। तब यह उस समय की जनसंख्या के लिए पर्याप्त थी, लेकिन अब दबाव बढ़ रहा है। इसी प्रकार एफएआर बढ़ने से पार्किंग भी अधिक चाहिए, लेकिन इसकी पहले से ही कमी है।

रातीबड़ और नीलबड़ को लो डेंसिटी करना गलत

रातीबड़ और नीलबड़ जैसे क्षेत्रों को मास्टर प्लान 2005 की तरह लो डेंसिटी या कम घनत्व वाले क्षेत्रों में शामिल किया गया है। यहां सरकार ने कृषि भूमि मानी है। जबकि यहां सिक्सलेन के साथ अन्य आधारभूत सुविधाओं का विकास हो रहा है। यहां कमर्शियल काम्प्लेक्स बन गए हैं। ऐसे में इस क्षेत्र को लो डेंसिटी में रखना गलत है।

मास्टर प्लान में बाघ भ्रमण क्षेत्र और बड़े तालाब के संरक्षण को लेकर ध्यान केंद्रित किया गया है। इसको लेकर जो भी आपत्तियां थी, मान ली गई हैं। अन्य मामलों में संशोधन की आवश्यकता है।

– कमल राठी, टाउन प्लानर

व्यावसायिक क्षेत्रों में एफएआर बढ़ाने से इंफ्रास्टक्चर पर दवाब बढ़ेगा। इंदौर रोड और रातीबड़ समेत अन्य क्षेत्रों को लो डेंसिटी में शामिल करना गलत है। अब इसको व्यवसायिक क्षेत्र में शामिल करना चाहिए।

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