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कब्रिस्‍तान की लाशों से गंदा पानी पीने को मजबूर यूक्रेन की जनता, नोवा कखोवका बांध टूटने से सबसे बड़ी मुसीबत

कीव: मंगलवार तड़के ब्‍लास्‍ट में तबाह हुआ बांध नोवा कखोवका अब बड़ी त्रासदी में तब्‍दील हो गया है। यूक्रेन में लोगों के सामने पीने के पानी का संकट पैदा हो गया है। हजारों लोगों को पाने का सामान्‍य पानी मुहैया नहीं हो पा रहा है। इसके बीच ही राहत और बचावकमिर्यों की तरफ से जो बताया गया है, वह दिल दहलाने वाला है। बचावकर्मियों का कहना है कि इस बात का डर है कि जो पानी पीने लायक था, वह भी अब कब्रिस्‍तान के शवों से प्रदूषित हो चुका है। ब्‍लास्‍ट की वजह से इस बांध के करीब स्थित 80 गांव पूरी तरह से बह गए हैं और कुछ इलाके पानी में डूब गए हैं। लोगों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाया जा रहा है।

पानी का बड़ा संकट

यूक्रेन के राष्‍ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्‍की ने इसे आतंकी कृत्‍य तक करार दिया है। नोवा कखोवका यूक्रेन का सबसे बड़ा बांध है। कखोवका बांध जो नीपर नदी पर बना है उसके टूटने से पानी का बड़ा संकट पैदा हो गया है। रूस और यूक्रेन दोनों ने एक दूसरे पर आरोप लगाया है। यूक्रेन नीपर नदी के पश्चिमी तट को नियंत्रित करता है और खेरसॉन शहर पर भी उसका नियंत्रण है। उसने रूस की सेनाओं पर इस बांध को उड़ाने का आरोप लगाया है। जबकि रूस का नदी के पूर्वी तट पर नियंत्रण है जो 300 किलोमीटर तक बहने के बाद काला सागर में मिल जाती है। रूस ने कीव की तरफ से जारी सैन्‍य हमलों को ब्‍लास्‍ट के लिए दोषी ठहराया है। बांध के नष्‍ट हो जाने के बाद खेरसॉन के कुछ हिस्सेपूरी तरह से पानी में डूब गए हैं।

पीने का पानी हुआ प्रदूषित
बाढ़ग्रस्त इलाके में बसे लोगों को अपने गांवों को छोड़कर भागना पड़ा। यूक्रेन के कुछ क्षेत्र अंधेरे में डूब गए हैं। आशंका जताई गई है कि पीने का पानी भी दूषित हो गया है। बाढ़ का पानी कब्रिस्तानों से होकर गुजर रहा है। इसलिए इस बात का डर है कि यह लाशों से प्रदूषित हो चुका है। बचावकर्ता ने बताया, ‘हमारे लिए पीने का पानी नीपर नदी से आता है। लेकिन अब कब्रिस्तानों में पानी भर गया है, इसलिए यह पीने के लिए सुरक्षित नहीं है।’ उन्‍होंने बताया कि पानी में तेल के अलावा पावर प्‍लांट के अवशेष और खदानें भी हैं। शहर में अब पानी तो बहुत है लेकिन पीने के लिए सुरक्षित पानी नहीं है।

दूषित पानी सबसे बड़ी चिंता
बचावकर्ता के मुताबिक ज्‍यादा से ज्‍यादा लोग घरों और फ्लैट्स में फंसे हुए हैं। आशंका है कि वे कुछ ही घंटों में डूब सकते हैं। बचावकर्ताओं की मानें तो उनके पास करने के लिए कुछ भी नहीं है। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की मानवीय सहायता एजेंसी ने चेतावनी दी है कि आने वाले घंटों में आपदा के और भी बदतर होने की संभावना है। यूएन के मुताबिक पीने के पानी तक पहुंच और दूषित पानी से जुड़े स्वास्थ्य जोखिम सबसे बड़ी चिंता है। अधिकारियों ने बताया कि नदी के दोनों किनारों के क्षेत्रों से करीब तीन हजार लोगों को निकाला गया है।

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