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बजट के बाद भी पाकिस्‍तान पर गहराया डिफॉल्‍ट होने का खतरा, आईएमएफ को खुश नहीं कर सके देश के वित्‍त मंत्री

इस्‍लामाबाद: गहरे आर्थिक संकट में फंसे पाकिस्‍तान के वित्‍त मत्री इशाक डार ने साल 2023-2024 का बजट शुक्रवार को पेश कर दिया है। वित्‍त मंत्री ने इसे पेश करते हुए कहा कि इस बजट में सरकार ने एक जुलाई से शुरू हो रहे वित्‍तीय वर्ष में आर्थिक उत्‍पादन के लिए 6.54 फीसदी घाटे का लक्ष्‍य तय किया है। उनका कहना था कि यह अनुमान से सात फीसदी से कम है। पाकिस्‍तान का बजट आने के बाद यह जरूरी हो गया है कि अंतरराष्‍ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) उससे संतुष्‍ट हो ताकि राहत पैकेज रिलीज किया जा सके। नवंबर में देश में चुनाव होने हैं मगर बजट के बाद कोई राहत उसे मिलेगी, इस बात के आसार कम हैं।

आईएमएफ को पसंद नहीं आया

विशेषज्ञों की मानें तो बजट आईएमएफ को प्रभावित करने में असफल रहा है। कराची स्थित इनवेस्‍टमेंट कंपनी वेंचर्स के चीफ इनवेस्टमेंट ऑफिसर शाहबाज अशरफ ने कहा कि यह एक सादा बजट है जिसमें ढांचागत सुधार के लिए कोई रास्‍ता नहीं है। आईएमएफ ने गुरुवार को कहा कि वह पाकिस्तान के साथ बजट पर चर्चा कर रहा है, जिसमें सामाजिक खर्च बढ़ाने के लिए जगह बनाते हुए ऋण स्थिरता को संतुलित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया हो।

एक और कंपनी लक्सॉन इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश अधिकारी मुस्तफा पाशा की मानें तो बजट आने के बाद अब आईएमएफ, रेवेन्‍यू कलेक्‍शन के लिए और उपायों की मांग कर सकता है। उनका कहना था कि बजट से आईएमएफ के साथ कर्मचारी स्तर का कोई समझौता होगा, इस बात की जरा भी संभावना नहीं है।
जरा भी संतुष्‍ट नहीं आईएमएफवित्‍त मंत्री डार ने कहा कि बजट में 9.2 अरब रुपए यानी 32 अरब डॉलर के कुल कर राजस्व का लक्ष्य होगा। साथ ही औद्योगिक क्षेत्र पर कोई नया कर नहीं होगा। उनकी मानें तो बजट जून 2024 में खत्‍म होने वाले वित्तीय वर्ष के लिए 2.5 अरब रुपए यानी 8.’ अरब डॉलर के शुद्ध बाहरी वित्तपोषण का लक्ष्‍य रखकर आगे बढ़ेगा। इसमें से 1.6 अरब रुपए यानी 5.5 अरब डॉलर वाणिज्यिक और यूरोबॉन्ड उधार के माध्यम से आएंगे। हालांकि, इनमें से कुछ भी आईएमएफ को संतुष्‍ट नहीं करने वाला है।
तीन चार महीने बाद ही डिफॉल्‍ट

वर्ल्‍ड बैंक के पूर्व सलाहकार आबिद हसन ने चेतावनी दी कि आईएमएफ इस बजट से संतुष्‍ट होगा, इस बात की संभावना 50 फीसदी से भी कम है। उन्‍होंने कहा कि अभी पाकिस्‍तान दिवालिया नहीं होगा लेकिन अगर तीन-चार महीनों में कोई नया आईएमएफ कार्यक्रम शुरू नहीं हुआ तो फिर 100 फीसदी आशंकाएं हैं कि यह देश कंगाल हो जाएगा। उनका कहना था कि आईएमएफ का कार्यक्रम की वज से निजी क्षेत्र में और रकम आएगी और इससे थोड़ी राहत मिल सकती है।

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