7 मेडिकोज ने ऑपरेशन थिएटर में मांगी हिजाब पहनने की परमिशन, केरल मेडिकल कॉलेज में बुर्का पर विवाद

तिरुवनंतपुरम: केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम सरकारी मेडिकल कॉलेज की 7 छात्रों के एक समूह ने प्रिंसिपल को पत्र लिखा। उन्होंने इस पत्र में ऑपरेशन थिएटर के अंदर हिजाब पहनने की अनुमति नहीं दिए जाने पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा है कि उन्हें जल्द से जल्द लंबी आस्तीन वाली स्क्रब जैकेट और सर्जिकल हुड पहनने की अनुमति दी जाए। 2020 एमबीबीएस बैच की एक छात्र की ओर से लिखे गए पत्र में 2018, 2021 और 2022 बैच की 6 मेडिकल छात्राओं के हस्ताक्षर हैं।
पत्र में कहा गया है कि उन्हें ऑपरेशन थिएटर के अंदर सिर ढकने की अनुमति नहीं है और उनकी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मुस्लिम महिलाओं के लिए हर परिस्थिति में हिजाब पहनना अनिवार्य है। इसमें कहा गया है, ‘हिजाब पहनने वाली महिलाओं को धार्मिक पोशाक पहनने और अस्पताल और ऑपरेशन कक्ष के नियमों का पालन करने के साथ-साथ विनम्रता बनाए रखने के बीच संतुलन बनाने में कठिनाई होती है।’
क्या बोले मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल?
कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. लिनेट जे मॉरिस ने पत्र मिलने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि वे लंबी आस्तीन और हुड का उपयोग करना चाहती हैं। मैंने उनसे कहा कि लंबे समय में यह संभव नहीं है क्योंकि ऑपरेशन के दौरान कोहनी तक हाथ धोना पड़ता है। हम इसका पालन नहीं करेंगे तो संक्रमण होगा। मैंने उन्हें बताया है कि मैं उनके अनुरोध पर निर्णय लेने की स्थिति में नहीं हूं। उन्होंने कहा कि सर्जनों और संक्रमण नियंत्रण विशेषज्ञों की एक बैठक बुलाई जाएगी। रोगी की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। हम एक समिति बुलाएंगे और दोनों पक्षों को देखें और ध्यान मरीजों की सुरक्षा पर होगा, जिससे समझौता नहीं किया जा सकता।
असोसिएशन भी खिलाफ
मेडिकल कॉलेज, कोझिकोड और एसोसिएशन ऑफ सर्जन्स ऑफ इंडिया की राष्ट्रीय कार्यकारी समिति के सदस्य डॉ. राजन पी ने कहा कि हमारे पास जाति, पंथ या धर्म के बावजूद दुनिया भर में एक मानक प्रणाली और प्रथाओं का सेट है। हमें चिकित्सा क्षेत्र में धर्म को लाने का प्रयास नहीं करना चाहिए। पहले, नन थिएटरों में अपनी धार्मिक पोशाक पहनती थीं, लेकिन वे पारंपरिक सर्जिकल पोशाक पहनने लगीं। हमें उन सिद्धांतों को कमजोर नहीं करना चाहिए।



