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सड़क पर फेंके थे जो टमाटर… आसमां छू रही आज कीमत, महाराष्ट्र की सबसे बड़ी मंडी की हकीकत जानिए

नासिक/पुणे: टमाटर की कीमत किस कदर आसमां छू रही है, इसका ताजी तस्वीर महाराष्ट्र के बाजार में देखी जा सकती है। यहां उत्पादकों को बाजार में टमाटर की रिकॉर्ड कीमतें मिल रही हैं। यह आलम तब है कि बमुश्किल एक महीने बाद, बहुतायत के कारण दरों में भारी गिरावट आई है। पिंपलगांव बसवंत और नासिक में कृषि उपज बाजार समितियों (Apmc) में भारी गिरावट के बाद खुदरा बाजार में एक किलो टमाटर की कीमत अब 80 रुपए से 100 रुपये के बीच पहुंच गई है। मई की बात करें तो नासिक में एक किलो टमाटर की खुदरा कीमत 20-25 रुपए थी। पिंपलगांव एपीएमसी टमाटर के व्यापार के मामले में महाराष्ट्र में सबसे बड़ा है। एपीएमसी के एक अधिकारी ने कहा कि नासिक में टमाटर की वर्तमान रोजाना आवक 4,000 क्रेट (20 किलोग्राम प्रति क्रेट) और पिंपलगांव में 129 है। पिछले महीने, नासिक और पिंपलगांव में उपज की यही रोजाना आवक क्रमशः 25,000 क्रेट और 250 क्रेट हुआ करती थी।

नासिक के बाद पुणे में है टमाटर की दूसरी बड़ी मंडी

इसी तरह, महाराष्ट्र में टमाटर की दूसरी सबसे बड़ी थोक मंडी पुणे के नारायणगांव एपीएमसी है। यहां टमाटर की खपत पिछले कुछ दिनों में 50% तक कम हो गई है। बाजार के अध्यक्ष संजय काले ने हमारे सहयोगी टीओआई को बताया, ‘हमें रोजाना 40,000 क्रेट टमाटर मिल रहे हैं, जबकि साल के इस समय में औसतन 80,000 से 1 लाख क्रेट मिलते थे। आपूर्ति में गिरावट ने मांग-आपूर्ति समीकरण को प्रभावित किया है और खुदरा कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। काले ने कहा, ‘रसोई के मुख्य उत्पाद अब रिकॉर्ड-तोड़ कीमत पर पहुंच रहे हैं। एक टोकरा 1,000-1400 रुपये की रेंज में बेचा जा रहा है। हम आने वाले दिनों में कीमतों में और वृद्धि से इनकार नहीं कर सकते, क्योंकि कोई नई ताजा खेती नहीं हुई है।’

एक महीने पहले फेंके जा रहे थे यही टमाटर

बीते एक महीने पहले यही आसमान छूने वाली कीमत पर पहुंचे टमाटर फेंके जा रहे थे। 18 मई को, ग्रामीण नासिक में टमाटर उत्पादकों के एक वर्ग ने एपीएमसी में सही दाम न मिलने के बाद टमाटर सड़कों पर फेंक दिए थे। तब किसानों को प्रति क्रेट 30 रुपये की पेशकश की गई। किसानों ने बेचने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि उत्पादन लागत बहुत अधिक है। नासिक में एपीएमसी के एक अधिकारी ने कहा कि किसानों के एक बड़े वर्ग ने भी अपनी फसलें नष्ट कर दी हैं, क्योंकि उन्हें डर है था कि उपज को आकर्षक कीमत नहीं मिलेगी। चूंकि पिछले महीने टमाटर की औसत थोक कीमतें 50 रुपये से 60 रुपये प्रति क्रेट के बीच थीं, इसलिए किसान परिवहन लागत भी नहीं निकाल पाए। अधिकांश टमाटर उत्पादकों ने अपने खेतों से बागान उखाड़ दिए थे। इसके अलावा, किसानों के एक वर्ग ने ऐसा किया ही किया था।

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