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वन विभाग भोपाल की बड़ी कार्यवाही अवैध बबूल की लकड़ी से भरा वाहन किया जप्त l

भोपाल- राजधानी भोपाल वन मंडल अधिकारी आलोक पाठक के मार्गदर्शन में अबैध लकडी़ कटाई एवं बगैर टीपी के परिवाहन करने पर रोक लगाने वन और वनप्रणीयो की सुरक्षा को लेकर काफी गंभीर नजर आ रहे हैं । उन्हीं के अधीनस्थ उड़नदस्ता भोपाल द्वारा दिनांक 11/4/2023 की रात परवलिया रोड मुबारकपुर में मुखबिर की सूचना के अनुसार वन चेक पोस्ट पर चौकसी बरती गई जिसमें हर प्रकार के वाहन को गंभीरता से देखा जा रहा था मुखबिर की सूचना मैं जिस वाहन की जानकारी दी गई आखिर उस वाहन को वन विभाग की टीम ने हिरासत में ले लिया। और दूसरे दिन करीबन 2से3 बजे जप्त किये गऐ को अहमदपुर डिपो ला कर खडा़ किया । अब यहां वन विभाग की टीम पर सवाल खड़ा होता है 10से 12 घंटों के बीच जप्त किया गया वाहन कहां था आखिर क्या वजह थी जो जप्ती किए हुए वाहन को डिपो में खड़ा करने के लिए इतना समय लगाया गया। वन विभाग की इस सारी कार्यवाही पर राजधानी के कई पत्रकार अपनी तेज नजर जमाए हुए थे, जिसमें दैनिक खास प्रचार की ब्यूरो चीफ एवं खबर खालसा न्यूज़ पोर्टल के प्रधान संपादक आर. एस. सिंह खालसा इस सारे मामले की पड़ताल करने अहमदपुर डिपो भोपाल पहुंचे जहां जानकारी मिली जप्त किए गए वाहन जिसमें नंबर प्लेट में दर्शाए गए नंबर सही नहीं थी एवं पीछे की तरफ कोई भी नंबर प्लेट नहीं मिली जप्त किए गए वाहन में बबूल की लकड़ी के मोटे-मोटे लट्ठे भरे हुए मिले। उक्त वाहन के ड्राइवर एवं कंडक्टर अहमदपुर डिपो पर मौजूद थे, जप्त किए गए वाहन में कितना माल था, यह लकड़ी कहां से लाई गई किस आरा मशीन पर भेजी जा रही थी इस वाहन का मालिक कौन है अवैध रूप से बबूल की लकड़ी को परिवहन करने वाला कौन व्यक्ति था इस सारे मामले की जानकारी वाहन के ड्राइवर और कंडक्टर से लेना चाही तब आनन-फानन में वहां पर मौजूद अस्थाई वन कर्मी उस वाहन के चालक और ड्राइवर को स्कूटर में बैठा कर रफूचक्कर हो गए। उक्त वाहन के ड्राइवर को इतनी तेजी में बगैर जानकारी दिए वहां से ले जाना एवं मुबारकपुर वन चैक पोस्ट से कई घंटों के विलंब के बाद अहमदपुर डिपो में दूसरे दिन खड़ा करना इस सारी वन विभाग की कार्यवाही पर सवाल खड़ा होता है। भोपाल वन मंडल अधिकारी को इसकी जांच करानी चाहिए आखिर क्यों मीडिया को जप्त किए गए वाहन के ड्राइवर कंडक्टर से पूछताछ क्यों नहीं करने दी वन कर्मियों द्वारा उक्त ड्राइवर कंडक्टर को साथ ले जाने में इतनी जल्दी बाजी क्यों की गई अगर वन कर्मी अपनी ड्यूटी को निभाने में इतने ही उत्साहित हैं तो फिर 10 से 12 घंटे का समय क्यों लगाया गया अहमदपुर डिपो में खड़ा करने पर यह भी महत्वपूर्ण सवाल है, इस वाहन को इतने समय तक कहां रखा गया, क्यों रखा गया यह भी एक बड़ी ही गंभीरता से जांच करने का विषय है। ज्ञात्वय हो ड्राइवर कंडक्टर को जल्दबाजी में ले जाने वाले ये वही वन कर्मी है जो 25 से 27 वर्षों से उड़नदस्ता भोपाल में अपना कब्जा जमाए हुए हैं। शासन का एक नियम है 3 वर्ष से अधिक कोई भी कर्मचारी किसी भी कार्यालय में कार्यत नहीं रह सकता तो फिर यह वन कर्मी इतने वर्षों से उड़नदस्ता भोपाल में क्यों जमे हुए हैं क्या इनका स्थानांतरण होना चाहिए या नहीं यह सवाल भी विचाराधीन है।

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