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बिना आंधी के ढह गया बिहार में गंगा पुल… जानिए कैसे हुई थी इसे बनाने वाली कंपनी की शुरुआत

नई दिल्ली: बिहार के भागलपुर जिले में बन रहे एक पुल का एक हिस्सा रविवार शाम को अचानक ढह गया। अगुवानी-सुल्तानगंज पुल (Aguwani Sultanganj Bridge) गंगा नदी पर बन रहा है। करीब एक साल में दूसरी बार इस पुल का हिस्सा ढहा है। पिछले साल एक मई को इस पुल का एक हिस्सा ढह गया था। इस पुल के दूसरी बार ढहने से बिहार में सियासी पारी भी चढ़ गया है। इस कारण इसे बनाने वाली कंपनी एसपी सिंगला कंस्ट्रक्शंस (SP Singla Constructions) एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है। यह कंपनी देश की प्रमुख कंस्ट्रक्शन कंपनियों में एक है जिसे नदी पर पुल बनाने में एक्सपर्ट माना जाता है। इस कंपनी ने देश के कई राज्यों में पुल बनाए हैं। बिहार में आरा और छपरा के बीच गंगा नदी पर बना पुल इसी कंपनी ने बनाया है। कंपनी का दावा है कि यह देश का मल्टी-स्पैन एक्स्ट्रा डोज्ड ब्रिज है। इसी तरह गुजरात में ओखा से भेट द्वारका के बीच 900 मीटर लंबा केबल स्टेय्ड स्पैन ब्रिज भी यही कंपनी बना रही है। आइए जानते हैं कैसे हुई थी इस कंपनी की शुरुआत…

इस कंपनी की स्थापना एसपी सिंगला ने की थी। पेशेवर से सिविल इंजीनियर सिंगला ने करीब 12 साल तक पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में छोटी-मोटी कंस्ट्रक्शन कंपनियों में काम किया। एक प्रोजेक्ट खत्म होने के बाद उन्होंने दूसरे प्रोजेक्ट की साइट पर जाना पड़ता था। ऐसे में परिवार को लगातार एक जगह से दूसरी जगह ले जाना मुश्किल था। एक रिपोर्ट के मुताबिक सिंगला कहते हैं कि परिवार को एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट करना समस्या थी। साथ ही बार-बार बच्चों का स्कूल बदलना भी मुश्किल था। सिंगला के दो बेटे हैं। इस दौरान उन्हें पता चला कि पीडब्ल्यूडी इंजीनियर्स को भी छोटे प्रोजेक्ट्स के लिए बोली लगाने की अनुमति देती है।

कैसे हुई शुरुआत

सिंगला को तब तक काफी अनुभव भी हो चुका था। फिर क्या था सिंगला ने नौकरी छोड़ दी और ठेकेदारी में कूद गए। उन्हें पहला ठेका 10 लाख रुपये का मिला। यह यमुना में एक छोटा पुल बनाने का था। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। एक के बाद एक कई प्रोजेक्ट्स उनके खाते में जुड़ते चले गए। आज उनकी कंपनी को नदी पर पुल बनाने में विशेषज्ञता हासिल है और कई राज्यों में उनके प्रोजेक्ट चल रहे हैं। हजारों लोग उनकी कंपनी में काम करते हैं। इस कंपनी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह लोन लेने के बजाय अपने ही संसाधनों से काम करने बेहतर समझती है। यही वजह है कि जब कंस्ट्रक्शन सेक्टर की कई बड़ी कंपनियां कर्ज के बोझ में दबी हैं, एसपी सिंगला लगातार आगे बढ़ रही है।

सिंगला कहते हैं, ‘मैंने पहले पांच साल अपनी साख बनाने में गुजारे ताकि कंपनी को बड़े प्रोजेक्ट मिल सकें।’ उन्हें पहला बड़ा ब्रेक साल 2000 में छत्तीसगढ़ में मिला। कंपनी को वहां पुल बनाने के लिए 12 करोड़ का ठेका मिला। इसके बाद 2006 में कंपनी के बिहार में एक बड़ा प्रोजेक्ट मिला। यह छपरा और आरा के बीच केबल ब्रिज था। 700 करोड़ रुपये के इस ब्रिज ने कंपनी को ब्रिज बनाने वाली प्रमुख कंपनियों की जमात में ला दिया। इसके बाद कंपनी ने असम के तेजपुर में ब्रह्मपुत्र नदी पर भी पुल बनाया। कंपनी ने IL&FS Engineering Services के साथ मिलकर मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक (Mumbai Trans Harbour Link) के लिए भी बोली लगाई थी। लेकिन उसे सफलता नहीं मिली।

बिहार में बनाए सबसे ज्यादा पुल

कंपनी की वेबसाइट के मुताबिक वह देश के विभिन्न राज्यों में अब तक 25 पुलों का निर्माण कर चुकी है। कंपनी ने सबसे ज्यादा आठ पुल बिहार में बनाए हैं। इसमें बिहार में आरा और छपरा के बीच गंगा नदी पर बना पुल इसी कंपनी ने बनाया है। कंपनी का दावा है कि यह देश का मल्टी-स्पैन एक्स्ट्रा डोज्ड ब्रिज है। इसी तरह कंपनी गुजरात में ओखा से भेट द्वारका के बीच 900 मीटर लंबा केबल स्टेय्ड स्पैन ब्रिज भी बना रही है। इसके अलावा कंपनी ने देश में कई मेट्रो प्रोजेक्ट्स के लिए भी काम किया है। पटना में गंगा नदी पर छह लेन का पुल बनाने का काम भी इसी कंपनी को मिला है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 2023 में कंपनी का रेवेन्यू 500 करोड़ रुपये रहा।

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