5 साल में चौथा चक्रवात, अचानक गुजरात की तरफ क्यों बढ़ने लगे हैं तबाही के इतने तूफान

अहमदाबाद: गुजरात में 15 जून को बेहद गंभीर चक्रवाती तूफान बिपरजॉय की आहट है। मौसम विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बीते पांच सालों में गुजरात तट को प्रभावित करने वाला चौथा बड़ा चक्रवात है। इससे पहले 2019 में चक्रवात वायु के चलते भूस्खलन हुआ फिर 2020 में महाराष्ट्र में आने वाले निसर्ग तूफान ने तटीय गुजरात में भीषण बारिश से नुकसान पहुंचाया। साल 2021 में तौक्ताई ने दीव-ऊना के पास एक भूस्खलन किया, जिससे व्यापक विनाश हुआ। गुजरात ने 1998 से अब तक 20 सालों में चार बड़े चक्रवातों का सामना किया। कांडला से टकराने वाले एक सुपर-चक्रवात ने तो मानव जीवन और संपत्ति को ऐसा नुकसान पहुंचाया, जिसके निशान 2018 तक देखने को मिले थे।
जलवायु परिवर्तन ने गुजरात को बनाया संवेदनशील
विशेषज्ञों की मानें तो जलवायु परिवर्तन ने गुजरात को चक्रवातों के प्रति संवेदनशील बना दिया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग, गुजरात के प्रमुख मनोरमा मोहंती ने कहा, ‘जलवायु परिवर्तन अरब सागर क्षेत्र में उष्णकटिबंधीय चक्रवातों में वृद्धि के लिए जिम्मेदार कई कारणों में से महत्वपूर्ण है।’ मौसम विभाग के अधिकारियों ने कहा कि लक्षद्वीप समूह के आसपास चक्रवातों की उत्पत्ति से लेकर गुजरात तक फ़नल के आकार की तटीय रेखा एक कारण है, जिससे कि चक्रवात सौराष्ट्र और कच्छ के तटों से टकराते हैं। एक अधिकारी ने कहा, ‘भविष्य में हिंद महासागर क्षेत्र में औसत सतही समुद्र के तापमान में वृद्धि के कारण राज्य में अधिक संख्या में चक्रवात आ सकते हैं।
बिपरजॉय के लिए युद्धस्तर पर तैयारी
सोमवार राज्य प्रशासन ने बिपरजॉय के लिए युद्धस्तर पर तैयारी शुरू कर दी। आईएमडी अधिकारियों के जरिए ताजा प्रक्षेपण ने संकेत दिया कि कच्छ-पाकिस्तान सीमा क्षेत्र के पहले के अनुमानों की तुलना में कच्छ में जखाऊ के पास लैंडफॉल हो सकता है। अधिकारियों ने कहा कि, ‘मंगलवार को तस्वीर और भी साफ हो जाएगी। सोमवार शाम तक चक्रवात पोरबंदर तट से 300 किमी दक्षिण-पश्चिम में था।’
पीएम मोदी ने की समीक्षा बैठक
पीएम नरेंद्र मोदी ने राज्य सरकार के साथ गुजरात में चक्रवात की तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और विभिन्न विभागों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। पीएम ने ट्वीट किया, ‘आने वाले चक्रवात बिपरजॉय के मद्देनजर तैयारियों की समीक्षा के लिए एक बैठक की गई। हमारी टीमें संवेदनशील क्षेत्रों से सुरक्षित निकासी और आवश्यक सेवाओं के रखरखाव को सुनिश्चित कर रही हैं। सभी की सुरक्षा और भलाई के लिए प्रार्थना करता हूं।’
क्या कहता है वैज्ञानिकों का रिसर्च
गुजरात तट की ओर बढ़ते चक्रवातों के लिए, 2021 में भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान के शोधकर्ताओं ने दावा किया था। इसके मुताबिक 1982 और 2000 की तुलना में 2001 और 2019 के बीच अरब सागर में चक्रवाती तूफानों की आवृत्ति और अवधि में 52% की वृद्धि हुई है। इस अवधि के दौरान बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफानों में 8% की मामूली गिरावट दर्ज की गई, जो कि उत्तर हिंद महासागर क्षेत्र में चक्रवातों के पैटर्न में एक प्रमुख बदलाव का संकेत है। चक्रवात भेद्यता पर आईएमडी के हाल ही में प्रकाशित एक रिसर्च में कहा गया है कि गुजरात ने हाल के दिनों में भारत के पश्चिमी तट पर राज्यों के बीच भेद्यता में वृद्धि दिखाई है।



