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 जब इतने रन बनाने के बाद भी टीम इंडिया में नहीं मिल रही जगह तो रणजी खेलने का मतलब क्या रह गया?

नई दिल्ली: ताजा खबर यह है कि आगामी वर्ल्डकप का क्वालिफायर टूर्नामेंट चल रहा है, जहां एक ग्रुप मुकाबले में सबसे कमजोर टीमों में शामिल जिम्बाब्वे ने वेस्टइंडीज को हरा दिया है। अब मजेदार बात यह है कि भारतीय क्रिकेट टीम इसी वेस्टइंडीज की मेजबानी में दो टेस्ट मैच खेलने के लिए लाव-लश्कर समेत तैयार है।पिछले साल जुलाई-अगस्त में भारत ने वेस्टइंडीज का दौरा किया था। तब तीन वनडे और पांच टी20 इंटरनेशनल मैचों की सीरीज में भारत ने सिर्फ एक टी20 मुकाबला गंवाया था। खास बात यह है कि इस दौरे पर बीसीसीआई ने शिखर धवन की अगुआई में अपनी ‘B’ टीम भेजी थी।

इस बार ऐसी क्या मजबूरी हो गई कि उसने रोहित शर्मा, अजिंक्य रहाणे, विराट कोहली जैसे सीनियर्स को भी इस दौरे पर भेजने का फैसला किया? लगातार दो वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल गंवाने के बाद उम्मीद की जा रही थी कि भारतीय टेस्ट टीम में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। आशा थी कि टेस्ट करियर के ढलान की और बढ़ते सीनियर्स खुद ही आने वाली पीढ़ी के लिए रास्ता बनाएंगे। कम से कम वेस्टइंडीज के दौरे से खुद को अलग करके कुछ दिन शरीर को आराम देंगे और फिर एशिया और वर्ल्डकप की तैयारी में जुटेंगे। लेकिन लगता है, टीम में स्थान गंवाने का डर उन्हें ऐसा करने से रोक गया।

ध्यान रहे, WTC का अगला फाइनल आते-आते रोहित 38 के,, पुजारा और रहाणे 37 के और विराट कोहली 36 साल के हो जाएंगे। यानि इनका क्रिकेट ज्यादा लंबा नहीं बचा है। जाहिर है, टेस्ट टीम की सूरत को बदलने का सही वक्त आ गया था, जिसकी शुरुआत आगामी वेस्टइंडीज दौरे से होनी चाहिए थी। ऐसा नहीं है कि टेस्ट टीम के लिए भारत के पास बेंच स्ट्रेंथ नहीं है, लेकिन लगता है चयनकर्ताओं की नजर और सोच आईपीएल और सोशल मीडिया की चमकीली दुनिया तक सीमित हो कर रह गई है।

विडंबना यह है कि टेस्ट स्पेशलिस्ट की जगह टी20 स्पेशलिस्ट को अगली पीढ़ी का टेस्ट स्टार बताया जाने लगा है। आईपीएल में सुर्खियां बटोरने वाले यशस्वी जायसवाल और ऋतुराज गायकवाड़ टीम में जगह पा जाते हैं। लेकिन वर्षों से डोमेस्टिक क्रिकेट में रनों का अंबार लगा रहे अभिमन्यु ईश्वरन और पिछले तीन सीजन से रणजी में तहलका मचा रहे युवा सरफराज खान एक बार फिर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं।

आंकड़ें और हालात बता रहे है कि रणजी में प्रदर्शन अब टीम इंडिया में चयन का पैमाना नहीं रह गया है। वरना 87 फर्स्ट क्लास मैचों में 22 शतक की मदद से 6556 बना चुके 27 साल के ईश्वरन और 37 फर्स्ट क्लास मैचों में करीब 80 के औसत से 3505 रन बना चुके 25 साल के सरफराज खान को नजरअंदाज तो नहीं किया जा सकता था। हालिया फॉर्म की बात करें तो अभिमन्यु के नाम पिछले 10 फर्स्ट क्लास मैचों में 5 सेंचुरी है, जिसमें चार शतक 150 प्लस के हैं। जहां तक इंडिया-A के लिए खेलने की बात है, वहां भी साल 2020 से अभी तक अभिमन्यु के नाम सबसे ज्यादा चार शतक हैं। इस दौरान शुभमन गिल और रजत पाटीदार ने दो-दो सेंचुरी लगाई है। सरफराज खान ने पिछले दो रणजी सीजन में सात जोरदार शतक जड़े हैं।

पिछले दो सीजन में उनका औसत क्रमश: 122.75 और 92.66 का रहा है। यदि डोमेस्टिक क्रिकेट में बनाए गए ये ढेर सारे रन भी आपको टीम इंडिया में जगह नहीं दिलवा सकते तो सवाल उठता है कि रणजी खेलने का आखिर क्या फायदा है। अब तो बस आप इंतजार कीजिए। कुछ ही दिनों बाद हमारे बूढ़े और कमजोर होते शेर वेस्टइंडीज पहुंचेंगे और सपाट पिचों पर एक कुंद बोलिंग अटैक पर पूरी ताकत के साथ प्रहार करके सोशल मीडिया पर छा जाएंगे। एक बार फिर उनके बल्लों से निकलते रिकॉर्ड की बात होने लगेगी। इसके साथ ही टेस्ट टीम की सूरत बदलने का विषय जमीदोर हो जाएगा।

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