ढाई टन पारे से बने हैं उज्जैन के पारदेश्वर महादेव

उज्जैन। धर्मधानी उज्जैन ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर के कारण विश्व विख्यात है। लेकिन पुराणों में उल्लेखित महाकाल वन में ऐसे अनेक शिवलिंग विराजित हैं, जिन की पूजा अर्चना से मनुष्य चारों पुरुषार्थ को प्राप्त कर सकता है। इन्हीं लिंगों से एक है, पारद शिवलिंग। मान्यता है पारद शिवलिंग में साक्षात शिव का वास होता है। इसके दर्शन मात्र से मनुष्य को सुख, सौभाग्य, आयु, आरोग्य व ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
2004 में हुई थी शिवलिंग की स्थापना
शिप्रा के नृसिंह घाट के समीप श्री सिद्ध आश्रम में श्री पारदेश्वर महादेव का भव्य मंदिर है। इस मंदिर में ढाई टन पारे से निर्मित विशाल शिवलिंग विराजित है। मान्यता है यह विश्व का सबसे बड़ा पारद शिवलिंग है। वर्ष 2004 में महामंडलेश्वर स्वामी डा.नारदानंदजी महाराज ने इस शिवलिंग की स्थापना की थी। प्रतिदिन सैकड़ों भक्त यहां पारद शिवलिंग के दर्शन करने आते हैं।
हर साल लाखों की संख्या में आते हैं भक्त
पारद शिवलिंग का दर्शन महापुण्य फलदायी है। जो पुण्य बारह ज्योतिर्लिंग, चौरासी महादेव व अनंतकोटी शिवलिंग के दर्शन से प्राप्त होता है, वही पुण्य फल मात्र पारदेश्वर महादेव के दर्शन से प्राप्त हो जाता है। पारद शिवलिंग में साक्षात शिव का वास माना गया है। इसलिए प्रतिवर्ष लाखों भक्त यहां पारदेश्वर महादेव के दर्शन करने आते हैं। – महामंडलेश्वर स्वामी डा.नारदानंदजी महाराज



