पुलिस के संरक्षण में एक और माफिया के रूप में उभर रहा बड़ा सट्टेबाज l

“क्या बनना चाहता है भोपाल का डॉन “
भोपाल– राजधानी में एक तरफ पुलिस कमिश्नर हरिनारायण चारी मिश्रा राजधानी को शांति के टापू बनाने में जुटे हुए हैं तो वही दूसरी तरफ क्षेत्रीय पुलिस उनके इस प्रयास में हिस्सा लेने को तैयार नहीं। थाना बागसेवनिया क्षेत्र के बाग मुगालिया मैं सट्टा माफिया के द्वारा बड़े पैमाने पर खाई बाजी की जा रही है, पिछले कुछ दिनों से सूत्रों से प्राप्त हुई जानकारी एवं वीडियो मिलने पर सट्टे का खुलासा मीडिया के माध्यम से किया जा चुका हैं, जिसकी जानकारी कई आला अधिकारियों तक पहुंच चुकी है , इसके बावजूद बाग मुगालिया का सट्टा माफिया अपने कई साथियों का सहयोग लेकर सट्टे के कारोबार को बड़ी तेजी से फैला रहा है। और क्षेत्र की पुलिस आंखों में काला मोटा चश्मा लगाकर कान में उंगली डाल कर चुपचाप शांत बैठी हुई है, क्या इस तरह राजधानी की पुलिस शांत बैठी रही तो क्या राजधानी शांति का टापू बन पाएगा। बाग मुगालिया क्षेत्र के एक सूत्र ने जानकारी देते हुऐ बतलाया जो कि सट्टे के खाई बाज का नजदीकी है नाम न बताने की शर्त पर उस सूत्र ने इसका भी खुलासा किया है ,कि सुभाष संगेकर उर्फ भाऊ अकेले बागमुगालिया मैं नहीं बल्कि बागसेवनिया, बरराई ,झागरिया ,पिपलिया पेदेखां ,बरखेड़ा पठानी, के अलावा उसका सट्टे का काम भोपाल के कई इलाकों में चल रहा है उसका यह भी कहना हैं राजधानी में 60 परसेंट सट्टे की खाई बाजी का काम सुभाष संगेकर उर्फ भाऊ का ही है। सूत्र बताते हैं इस खाईबाज को बागसेवनिया थाने के अलावा और भी कई थानों का खुला समर्थन है जिसकी वजह से इसका यह कारोबार राजधानी बहुत तेजी से बढ़ रहा है । कुछ हद तक तो सूत्रों की जानकारी में सत्यता हैं ( तुम डाल- डाल हम पात- पात ) की तर्ज पर क्षेत्र में कितने प्रकार के अपराध हो रहे हैं अपराधी कौन कौन से हैं इसकी पुलिस को पूरी तरह जानकारी रहती है। अब सवाल यह है अगर पुलिस का समर्थन नहीं होता , तो क्या इतने क्षेत्रों में वह व्यक्ति सट्टे के कारोबार को कर सकता था यह भी एक प्रश्न है.? अब प्रश्न यह भी है पुलिस प्रशासन अगर इस तरह शांति से बैठी रही तो राजधानी शांति का टापू बन पाएगा , हां टापू तो नहीं बन सकेगा लेकिन टाप-टाट के अपराध बड़ते रहेगे और टाप-टाप अपराधी भी जन्म लेते रहेगे। बागमुगालियां में सट्टे के इस खेल का खुलासा जब मीडिया के माध्यम से हुआ तब एक-दो दिन चोरी-छिप्पे से खाईबाज का खेल चलता रहा थोड़ा कम हुआ था मगर अब बड़े जोरों शोरों से सट्टे का खेल बेधड़क खेला जा रहा है। ऐसे में क्या पुलिस कमिश्नर राजधानी को शांति का टापू बना सकेंगे या शांति का टापू बनाने के लिए तीन- तीन वर्षो से जमे थाना प्रभारियों को बदलेगे।






