वन विभाग एक म्यान में कैसे रखेगा दो तलवार

एक पहले से दूसरी जबरदस्ती
घुसने को तैयार
भोपाल. राजधानी के वन मंडल अधिकारी के अधीनस्थ उड़न दस्ता भोपाल में भोपाल जिले की आरा मशीनों के ऊपर राज करने की ओढ़ में डिप्टी रेंजरो का अच्छा खासा रोष देखा जा रहा हैं।

कुछ माह पूर्व उड़न दस्ता भोपाल का प्रभारी रेंजर अनिल शर्मा के रिटायरमेंट के बाद डिप्टी रेंजर दिनेश जोशी को प्रभार सौंप दिया गया था जिन की कुछ दिन पूर्व पदोन्नति भी हो गई है, पदभार संभालते ही लगभग 15 या 20 दिनों के पश्चात उड़न दस्ता भोपाल प्रभारी फूल के गदगद हो गया , सूत्रों से जानकारी प्राप्त हो रही है वर्तमान में उड़न दस्ता प्रभारी कुछ विशेष स्थाई वनकर्मियों की फौज बनाकर राजधानी की आरा मशीनो में घुसपैठ बनाने की रफ्तार पकड़ा हुआ है यहां ज्ञातव्य हो स्थाई वनकर्मियों की जो फौज उड़न दस्ता प्रभारी के दाएं बाएं रहती है यह वही लोग हैं जिनका राजधानी में कई सालों से भ्रष्टाचार एक के बाद एक सुर्खियों में आता रहा है यह वही लोग हैं जो राजधानी के आसपास अवैध रूप से या बगैर टीपी से लड़कियों का परिवहन होने मैं सहयोग करते थे ये वही लोग हैं जिनके मोबाइलो मैं लकड़ी माफियाओं के द्वारा लकड़ी से भरे हुए वाहनों की फोटो एवं जानकारी भेज दी जाती है इन्हीं के द्वारा बगैर टीपी की लकड़ी से भरे वाहनों को पास करवा कर भोपाल की आरा मशीनों पर सारा माल डंप करवा दिया जाता है।

सूत्रों से जानकारी यह भी प्राप्त हो रही है भोपाल उड़न दस्ता प्रभारी अपनी फौज के साथ आजकल राजधानी की आरा मशीनों पर आए दिन देखा जा रहा है देखा जाना भी चाहिए क्योंकि इन्हीं के द्वारा भोपाल की आरा मशीनों का डेली रूटीन का जो स्टॉक रजिस्टर है उसको मेंटेन करना और रोज चेक करना भी इन्हीं की जिम्मेदारी बनती है लेकिन ऐसा न होकर 20 दिन 15 दिन के बीच आरा मशीनों पर पहुंचते हैं 5-7 मिनट के बाद चाय पानी पीकर रवानगी डाल लेते हैं आखिर यह किस तरह की कार्यवाही है जो समझ से परे है, सूत्र यहां तक बता रहे हैं किसानों की फसले धीरे-धीरे काटना शुरू हो गई है और इसी लड़ी में लकड़ी माफिया के द्वारा पेड़ काटने भी शुरू हो गए हैं और वह आए दिन भोपाल की आराम मशीनों पर डंप भी हो रहे हैं कहीं यह वही खेल तो नहीं शुरू हो गया जो कई वर्षों से उड़न दस्ता भोपाल की टीम और लकड़ी माफिया की टीम का जो मिला-जुला खेल था वही खेल खेला जा रहा हो।

कुछ माह पूर्व बनाए गए उड़न दस्ता प्रभारी भोपाल

कई वर्ष पूर्व रह चुके उड़न दस्ता भोपाल प्रभारी जिनके कारनामों की वजह से टाइगर रिजर्व स्थानांतरण हुआ था मंत्रालय और मंत्री के यहां कई चक्कर काटने के बाद भोपाल डिविजन में एक बार फिर करवाया स्थानांतरण और अब उड़न दस्ता भोपाल मैं जमाना चाहता है एक बार फिर कब्जा।
वहीं दूसरी तरफ उड़न दस्ता भोपाल में प्रभारी के पद पर रहे डिप्टी रेंजर राजकरण चतुर्वेदी अपने रसूक के दम पर भोपाल उड़न दस्ता पर कब्जा करना चाहते हैं कुछ महीनो से लगातार जानकारियां प्राप्त हो रही थी कि इस डिप्टी रेंजर के द्वारा मंत्रालय के स्थापना विभाग और मंत्री के यहां अच्छे खासे चक्कर कटे जाना देखा जा रहा था वह शायद यही कारण था जो उनका स्थानांतरण भोपाल वन मंडल अधिकारी के भोपाल डिवीजन में हो गया हैं यहां एक बार फिर ज्ञात कर दे यह वही डिप्टी रेंजर है जो कई वर्षों से अपने कारनामों की वजह से चर्चित रहा है जिसकी चर्चा राजधानी के मीडिया संस्थानों और वन विभाग में बनी रही है, अब सवाल यह है स्थानांतरण तो हो गया वहीं दूसरी तरफ कुछ माह पूर्व से उड़न दस्ते का प्रभारी एक डिप्टी रेंजर बना दिया गया है क्या उसे हटाकर विवादों में और सुर्खियों में रहे दूसरे डिप्टी रेंजर को प्रभार सोंपा जाएगा। क्या एक उड़न दस्ता प्रभारी की कुर्सी पर दो-दो उड़ान दस्ता प्रभारीयो को बैठाया जाएगा।
वैसे एक कहावत है (एक म्यान में दो तलवारे नहीं रह सकती ) ठीक उसी तरह एक कुर्सी पर दूसरा प्रभारी भी नहीं रह सकता हैं अब यह फैसला करना वन विभाग के उन अधिकारियों के लिए सर दर्द बन गया है। इसमें ज्यादा वन विभाग के अधिकारियों को सर दर्द नहीं लेना चाहिए उन्हें वही करना चाहिए जो डिप्टी रेंजर चरित्रवान हो, ऊर्जावान हो ,ईमानदार हो, कर्तव्य निष्ठावान हो , उसको ही उड़न दस्ते की कमान सौपना चाहिए। उन्हें रसूखदारी या चाटुकारी करने वाले डिप्टी रेंजर को उड़ान दस्ती की कुर्सी से दूर ही रखना चाहिए।

इनका कहना हैं…
मेरे अधीनस्थ आने वाला उड़न दस्ता भोपाल में तो पहले से ही प्रभारी पदस्थ है दूसरे प्रभारी के लिए कोई स्थान रिक्त नहीं है इसकी जानकारी हम ऊपर के अधिकारियों को लिखित देंगे वह निर्णय लेंगे इस विषय में क्या करना है, मेरे उड़न दस्ता भोपाल में तो पहले से ही एक प्रभारी कार्यरत है।
आलोक पाठक
वन मंडल अधिकारी भोपाल



