अनिल अग्रवाल की वेदांता ने गिरवी रखे इस कंपनी के सारे शेयर, सरकार की भी है 29.5% हिस्सेदारी

नई दिल्ली: अरबपति कारोबारी अनिल अग्रवाल (Anil Agarwal) की कंपनी वेदांता लिमिटेड (Vedanta Ltd.) ने हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड (Hindustan Zinc Ltd.) में अपने लगभग सभी शेयर गिरवी रख दिए हैं। इस कंपनी में वेदांता की 64.92 फीसदी हिस्सेदारी है जबकि 29.5 फीसदी सरकार के पास है। वेदांता ने स्टॉक एक्सचेंजेज की दी जानकारी में बताया कि उसने फंड जुटाने के लिए कंपनी में अपनी हिस्सेदारी गिरवी रखी है। बिजनस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक वेदांता पिछले एक साल से इस कंपनी के शेयरों की गिरवी रख रही थी। इसी कड़ी में उसने 3.3 फीसदी शेयर मंगलवार को गिरवी रखे। फाइलिंग के मुताबिक कंपनी ने 23 मई को जेपी मॉर्गन चेज बैंक (JPMorgan Chase Bank) में HZL के शेयर गिरवी रखे हैं। इस तरह वेदांता लिमिटेड HZL के 64.5 फीसदी शेयर गिरवी रख चुकी है जिसमें प्रमोटर की हिस्सेदारी 99.4 फीसदी है।
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक वेदांता ने जेपी मॉर्गन चेज एंड कंपनी और ओकट्री से 85 करोड़ डॉलर का लोन लिया है। वेदांता का पेरेंट कंपनी वेदांता रिसोर्सेज को बुधवार को 50 करोड़ डॉलर के बॉन्ड का रिपेमेंट करना था। उसके एक दिन पहले वेदांता ने जेपी मॉर्गन और ओकट्री के साथ डील कर दी। इस बारे में वेदांता ने कोई टिप्पणी करने से इन्कार कर दिया। मार्च में खत्म हुई फाइनेंशियल ईयर में वेदांता लिमिटेड ने 37,700 करोड़ रुपये का रेकॉर्ड डिविडेंड दिया है। इससे उसकी पेरेंट कंपनी को अपना कर्ज कम करने में मदद मिली है। 23 मई को कंपनी ने 6,877 करोड़ रुपये का चालू वित्त वर्ष का पहला अंतरिम डिविडेंड घोषित किया था।
सरकार का इन्कार
वेदांता रिसोर्सेज की वेदांता लिमिटेड में 68.11 फीसदी हिस्सेदारी है। फाइनेंशियल ईयर 2023 में हिंदुस्तान जिंक ने 31,900 करोड़ रुपये के चार डिविडेंड दिए थे और वह पहले बार कर्ज मुक्त कंपनी बनी थी। जनवरी में ग्रुप ने अपने ग्लोबल जिंक एसेट्स को एचजेडएल में मर्ज करने का प्रस्ताव दिया था लेकिन सरकार ने इसे मंजूरी नहीं दी थी। सरकार का कहना था कि यह प्रस्ताव माइनोरिटी शेयरहोल्डर्स के हितों के खिलाफ है। सरकार ने इस कंपनी में अपनी 26 फीसदी हिस्सेदारी 2002 में वेदांत ग्रुप (Vedanta Group) को बेच दी थी। बाद में कंपनी ने ग्रुप में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 64.92 फीसदी पहुंचा दी।


