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 अभी मत लगाइए EMI कम होने की उम्मीद! आरबीआई गवर्नर ने कह दी ये बड़ी बात, पूरी डिटेल

नई दिल्ली: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने कहा कि महंगाई के खिलाफ लड़ाई खत्म नहीं हुई है। महंगाई को लक्ष्य सीमा के भीतर लाकर हमारा काम अभी आधा ही हुआ है। बेशक रिटेल महंगाई कम हुई है, मगर हमें आगे की तस्वीर देखनी है और उसके अनुसार कार्रवाई करने के लिए भी तैयार रहना है। गौरतलब है कि मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी (MPC) की 6 से 8 जून को बैठक हुई थी। इसमें रीपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। गुरुवार को जारी इस बैठक की मिनट्स में RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत हो रही है और विकास की संभावनाएं लगातार बेहतर हो रही हैं। बैंकों और कॉरपोरेट्स की बैलेंस शीट हेल्दी दिखाई देती है।

उन्होंने कहा कि ग्लोबल लेवल पर इकॉनमी में अनिश्चितता बेशक कम हुई है, मगर यह बनी हुई है। ऐसे में आगे किसी तरह के कदम उठाए जाएंगे, अभी कहना मुश्किल है। भविष्य की कार्रवाई के बारे में कोई ठोस बात कहना मुश्किल है। गौरतलब है कि सरकार ने RBI को यह सुनिश्चित करने के लिए बाध्य किया है कि रिटेल महंगाई दर चार फीसदी से नीचे रहे। मई में रिटेल महंगाई दर घटकर 4.25% पर आ गई।

रीपो रेट को 6.5% पर अपरिवर्तित रखने के लिए मतदान करते हुए, MPC सदस्य और डिप्टी गवर्नर माइकल देबब्रत पात्रा ने कहा कि रेट्स में कोई बदलाव ना करने और इसे पहले के स्तर पर रखने के लिए उनके वोट को खिलाड़ी की ओर से मिडल स्टंप गार्ड लेने के रूप में देखा जाना चाहिए, जो बाउंसिंग पिंच पर खेलने की तैयारी में हैं। बेशक पॉलिसी रेट्स अपने उच्च स्तर पर पहुंच चुकी हैं मगर हमें सतर्क रहते हुए स्थिति का आकलन करना चाहिए ताकि जरूरत पड़ने पर पॉलिसी को सख्त बनाने पर फैसले लिए जा सकें।

महंगाई की पिक्चर अभी बाकी है

रिजर्व बैंक ने साफ कर दिया है कि वह रेपो रेट को कम करके लोन सस्ता करने में जल्दबाजी नहीं करेगा। यानी अभी रेट कम नहीं होंगे। साथ ही उसने यह बात भी कही है कि डिमांड की यह तस्वीर रही तो रेट फिर बढ़ सकते हैं। इसका मतलब है कि अगर महंगाई कम हुई और ग्लोबल इकॉनमी में सुधार हुआ, तो वह रेट कम कर सकता है। लेकिन स्थिति बिगड़ी और महंगाई बढ़ी तो वह फिर से रेट बढ़ा सकता है। रेट में बदलाव को लेकर वह इंडस्ट्री के दबाव में नहीं आएगा। रिजर्व बैंक की राय है कि यह सोच लेना कि महंगाई बढ़ने का खतरा खत्म हो गया है, अभी ठीक नहीं। लड़ाई जारी है। अल नीनो का असर ज्यादा पड़ा, कम बारिश हुई, साथ में ग्लोबल इकॉनमी में सुस्ती बढ़ी तो देश में महंगाई बढ़ भी सकती है। साफ मतलब है कि रिटेल महंगाई के 4.25 फीसदी आने या थोक महंगाई दर के माइनस में आ जाने पर ज्यादा खुश होने की जरूरत नहीं है। जो माहौल है, उसमें महंगाई फिर से बढ़ जाए तो हैरत की बात नहीं है।

गेहूं की कीमतों में फिर तेजी

स्टॉक लिमिट लगाए जाने के बावजूद गेहूं की कीमतों में नरमी नहीं आ रही है। 14 जून को गेहूं पर स्टॉक लिमिट लगाई गई थी। इसके बाद कुछ दिनों में गेहूं की कीमत थोड़ी गिरी, फिर स्थिर हुई। मगर अब इसमें फिर तेजी आ रही है। ऐसे में गेहूं के साथ आटा, मैदा के दाम में बढ़ोतरी हो सकती है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार स्टॉक लिमिट लगाने जाने के बाद गेहूं की कीमतें 2,200 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गए थे, मगर अब फिर से यह 2,300 रुपये से ज्यादा के लेवल पर पहुंच गउ। गौरतलब है कि सरकार गेहूं की कीमतों पर कंट्रोल के लिए सभी तरह से उपाय कर रही है। सूत्रों का कहना है कि इस साल गेहूं की उत्पादन 11.2 करोड़ टन रहने का अनुमान लगाया था मगर उत्पादन 10 करोड़ टन से भी कम रह सकता है। अगर ऐसा हुआ तो सरकार के लिए गेहूं की कीमतों को कंट्रोल में रख पाना वाकई मुश्किल होगा।

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