वन विभाग और एमपीआरडीसी अवैध प्लाटिंग करने वाले बिल्डरों पर मेहरबान

” वन विभाग की कछुऐ वाली चाल राजधानी के बिल्डरों की स्पीड़90“
रोलर चलाकर सड़कें बनाई गई
भोपाल – राजधानी भोपाल के नए बाईपास पर बगैर टीएनसीपी के अवैध प्लाटिंग करने वाले बिल्डरों पर वन विभाग एवं एमपी आरडीसी की फुल मेहरबानियां बनी हुई राजधानी के कई अखबारों में प्रकाशित हुई खबरों के माध्यम से वन विभाग और एमपीआरडीसी को हिला कर नींद खुलवाने की कई बार कोशिश की गई है, लेकिन अफसोस यह दोनों विभाग आंख खोलकर देख तो लेते हैं और फिर लंबी तान के वापस हो जाते हैं। इन दोनों विभागों की गहरी नींद का फायदा उठाते हुए राजधानी के बिल्डरों ने भोपाल बाईपास रोड पर विभाग द्वारा लगाए गए प्लांटेशन हरे भरे वृक्षों को नष्ट नाबूत तो किया ही है साथ में तार की फेंसिंग और खंभों तक को गायब कर दिया गया है, इन्हीं बिल्डरों के द्वारा अपनी मनमर्जी से निजी सड़कों का संचालन भी किया चुका है जिसमें कई हरे-भरे पेड़ों को काटा गया है, राजधानी के समाजसेवी पत्रकार सरदार आर. एस. सिंह खालसा (बाबा खालसा ने अपने अखबार, यूट्यूब चैनल, एंव खबर खालसा वेबसाइट न्यूज़ पोर्टल पर कई बार खबरें प्रकाशित कर विभाग के आला अधिकारियों को जानकारी भी पहुंचाई थी। जिसमें वन विभाग के अधिकारियों का कहना रहा हमने हाईवे से लगे हुए प्लांटेशन को एमपीआरडीसी के हैंडोबर कर दिया है फिर भी हम इसकी जांच करा के दोषी बिल्डरों पर जुर्माना लगाएंगे वन विभाग के एसडीओ भदोरिया ने कार्यवाही तो की लेकिन धीरे-धीरे उनकी यह कार्यवाही कछुऐ की चाल में बदल गई अब ऐसा प्रतीत हो रहा है कि यह सारा मामला अब गर्भ की गुफा में समाने की तैयारी में जुटा हैं। ज्ञातव्य हो एस डी ओ आर. एस. भदौरिया के द्वारा कल्याणपुर स्थित एक कॉलेज पर करीबन 8 लाख का मुआवजा वसूला तो गया था लेकिन वह राशि कहां जमा की गई यह भी एक जांच का विषय है, परंतु इसी रोड पर करीबन 8 से 10 बिल्डरों को नोटिस तो दिए थे लेकिन बाद में इसका क्या हुआ यह भी कहीं कहानी तो नहीं बन गई। इस मामले को पतंग की तरह खुल्ली डी़ल दी जा रही है शायद इसलिए की राजधानी मैं अवैध प्लाटिंग करने वाले बिल्डर जल्द से जल्द अपने प्लाटों को भेचकर नौ दो ग्यारह हो जाए। वही हम बात करें एमपीआरडीसी की तो विभाग के चीफ इंजीनियर रिजवी साहब ने स्पष्ट रूप से स्वीकारा था कि हमारे विभाग द्वारा इन बिल्डरों को सड़क बनाने की किसी भी प्रकार की कोई परमिशन नहीं दी गई। यहां याद दिलाना चाहते हैं हाईवे रोड के दोनों तरफ 60- 60 फिट जमीन एमपीआरडीसी की हैं तो फिर विभाग उनकी जमीन पर बगैर परमिशन इन बिल्डरों द्वारा निजी सड़क का संचालन कैसे और क्यों किया गया यह भी एक बहुत बड़ा सवाल है..? इस सारे मामले में एमपीआरडीसी की भी जिम्मेदारी बनती है, की अवैध प्लाटिंग करने वाले इन बिल्डरों ने अवैध तरीके प्लांटेशन को नष्ट कर निजी सड़कें जो संचालित की है उन पर कठोर कार्यवाही करते हुए जुर्माना लगाकर मुआवजा वसूल करने का प्रयास क्यों नहीं किया जा रहा है यह एक प्रश्न चिन्ह को जन्म देता है।





