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वर्तमान काल में कितनी प्रासंगिक है मध्य प्रदेश में छोटे जिले बनाने की मांग

शिव मोहन सिंह
प्रधान संपादक खबर खालसा

आए दिन समाचार पत्रों में प्रदेश के भिन्न-भिन्न तहसील अथवा अनुविभागीय स्तर के आम नागरिकों द्वारा उन्हें जिले स्तर का दर्जा दिए जाने की मांग अब आम हो गई है. हालांकि कालांतर में राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति हेतु अनेक जिले बनाए भी गए हैं लेकिन इस प्रकार राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति हेतु बनाए गए जिले शने शने उस तहसील अथवा अनु विभाग के निवासियों में असंतोष का कारण बनते गए जिनको जिला बनाए जाने की मांग वह वर्षों से करते आ रहे थे. आज भी आप मध्य प्रदेश में देख लीजिए आए दिन कभी मुलताई तो कभी पिपरिया आदि अनु विभागों के नागरिकों द्वारा जोर शोर से इन्हें जिला बनाए जाने की मांग की जा रही है. विकास विकास और विकास की बात करने वाली सरकारों को इन मांगों पर गंभीरता पूर्वक ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है कारण यह बढ़ती हुई जनसंख्या आवागमन के साधनों में भारी असुविधा के साथ ही महंगा परिवहन गरीब आम अवाम को कहीं से कहीं तक संविधान में प्रदत उसके मौलिक अधिकारों की पूर्ति नहीं कर पा रहा है. जिला मुख्यालय की दूरी उनके अधिकारों का हनन कर रही है. आर्थिक विपन्नता उनको उनके मौलिक अधिकारों को प्राप्त करने में बाधा उत्पन्न कर रही है. जिला मुख्यालय के मुखिया कलेक्टर के साथ ही अन्य विभागों के विभाग प्रमुख जिला मुख्यालय से 80 से 100 सवा सौ किलोमीटर का सफर करने में अपने आप को आ सहज पाते हैं जिसके कारण सुदूर तहसीलों और अनुविभाग मैं प्रशासनिक अराजकता का माहौल व्याप्त रहता है जिसके कारण गरीब आम आवाम घुट घुट कर जीने के लिए विवश है वह तो भला हो लोकतंत्र के चौथे स्तंभ मीडिया का जिसके कारण कभी-कभी इस समाज से कटे हुए आम अवाम की आवाज जिला मुख्यालयों तक पहुंच जाती है और कभी-कभी उनको न्याय प्राप्त हो जाता है. इस विषय में उन राजनीतिक दलों को जो इस आवाम को 5 साल में एक बार याद करते हैं अब उनको इनके प्रति भी गंभीर होना पड़ेगा. वैसे भी विकास के लिए प्रदेश में छोटे जिले की आवश्यकता बरसों से महसूस की जा रही है और अब उसके अमल का वक्त आ गया है वास्तव में यदि शासक दल समाज की आखिरी बिंदु तक संविधान की भावना के अनुरूप वंचित तबके को उसके मूल अधिकार दिलवाना चाहता है और विकास को प्रथम पायदान से लेकर अंतिम पायदान तक उसे पहुंचने का लक्ष्य है तो प्रदेश में छोटे जिले बनाए जाने की उनकी मांगोंपर बगैर किसी भेदभाव के शासन प्रशासन को तत्काल चिंतन मनन करते हुए उस पर अमली जामा पहनाना होगा. और यदि देखा जाए तो तीव्र विकास के साथ समाज के वंचित तबके को यदि वास्तव में उसे उसके मूल अधिकारों से वंचित न रखने का संकल्प लेना ही है तो वर्तमान में प्रदेश के समस्त अनु विभागों में सीमित अधिकारों के साथ आई ए एस कीपद स्थापना तो कर ही देना चाहिए. यह कदम जिले में प्रशासनिक तंत्र की सुदृढ़ता के साथ ही विकास पर निगरानी और आम अवाम को न्याय दिलाने मैं अपनी महती भूमिका का निर्वहन करेगा.

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