संभागीय उड़नदस्ता पूरी गर्मी बैठा ठंडक में अब बारिश के भी ले रहा नजारे

उड़न दस्ते की पूरी टीम बैठी बेकार चैन की नींद सो रहे सीसीएफ
भोपाल. भोपाल संभाग में आने वाले जिले जैसे विदिशा, रायसेन, राजगढ़, सीहोर, अब्दुल्लागंज, भोपाल, इतने जिलों की आरा मशीनों पर कई हजारों टन लकड़ियों का अंबार लगा हुआ है यह सारा माल आरामशीन के मालिकों द्वारा दाबा किया जा रहा हैं कि उनकी आरा मशीनों पर जितना भी स्टॉक किया गया है वह सारा का सारा वन विभाग के द्वारा दी गई टीपी का है।

पहले तो राजस्व की परमिशन के बिना वन विभाग टीपी जारी नहीं करता था लेकिन अब आसान प्रतिक्रिया बना दी गई है, बताया जा रहा है ग्राम पंचायतों में सरपंच की परमिशन के द्वारा हरे भरे पेड़ों को काटा जा सकता है जबकि पंचायत द्वारा परमिशन के साथ-साथ पटवारी या तहसीलदार की अनुशंसा की भी आवश्यकता होती है इसके बाद ही वन विभाग परिवहन करने के लिए टीपी जारी करने के लिए बाध्य होता है। सूत्रों के अनुसार बताया जा रहा है आरा मशीन संचालकों के द्वारा एक टीपी बनवा ली जाती है जिसकी आड़ में कई वाहनों द्वारा सैकड़ों टन लकड़ी मंगा ली जाती है, चलो मान भी लें किनारा मशीनों पर जितना भी स्टाक किया गया है वह सारा का सारा नियम अनुसार है इस बात की पुष्टि तब होगी जब वन विभाग के उड़न दस्ते द्वारा जांच की जाए लेकिन जब संभाग का उड़नदस्ता कई कई महीनों से जंग खा रहा हो और उड़न दस्ते के कर्मचारी अधिकारियों की सेवा में लगे हो या फिर फालतू बैठकर मूंगफली छीलकर खा रहे हो तो ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह स्टॉक कितने नियम कानूनों का पालन कर किया गया होगा।




जानकारी के अनुसार सीसीए भोपाल राजेश खरे के द्वारा नियम विरुद्ध वनपाल को सीसीएफ उड़न दस्ते का प्रभारी जब बनाया गया था उस समय सीसीएफ का उड़नदस्ता पूरे संभाग में सकरी था, वनपाल के काले कारनामे सामने आते ही उस पर कार्यवाही की गई और उसे संभागीय उड़नदस्ता प्रभार से हटा दिया गया ठीक उसी समय से संभाजी उड़नदस्ता ठप पड़ा हुआ है साथ में भोपाल जिले का भी उड़नदस्ता चुपचाप बैठा हुआ है और बारिश के नजारे ले रहा है।
जबकि समय-समय पर उड़न दस्ते की टीम को सभी आरा मशीनों पर जाकर उनके स्टाफ के बारे में जानना चाहिए कितना माल कहां से आया कितनी टीपी है कौन-कौन सी परमिशन है इसके अलावा बिल बुक स्टॉक रजिस्टर की भी जांच हर महीने होनी चाहिए जोकि नहीं की जा रही है इन आरा मशीनों को संचालित करने से पहले कितनी जगह अमंटन गई है और वह इन लकड़ियों के स्टॉक के लिए कितनी जगह का इस्तेमाल कर रहे हैं इन सभी चीजों की जांच तो कब होगी जब सीसीएफ का उड़नदस्ता अपने संभाग में समय-समय पर गस्ती करता रहेगा उड़नदस्ता उसी समय से अपनी जगह पर जाम है और उसकी टीम पूरी तरह से स्वस्थ और बेकार बैठी हुई है।
वन विभाग के कुछ कर्मचारियों का कहना है के बारिश के समय में लकड़ी का परिवहन पूरी तरह से बंद हो जाता है जबकि सूत्र बताते हैं 12 महीने लकड़ी का परिवहन होता है बारिश के मौसम में थोड़ी सी कमी अवश्य आ जाती है आज भी इन जिलों में लकड़ी माफिया बराबर काम कर रहा है वन विभाग तो तब दावा करेगा जब बराबर हर मौसम में कष्ट करें और इन आरा मशीनों पर पैनी नजर रखकर हर महीने जांच पड़ताल भी करें।
अभी हम बात करें सिर्फ रायसेन जिले के मंडीदीप क्षेत्र की जहां की आरा मशीनों पर
सैकड़ों टन लकड़ी का स्टाक किया हुआ है सूत्रों से जानकारी के अनुसार इन आरा मशीनों पर कभी-कभी चिकलोद रेंज के कुछ वन कर्मचारी खानापूर्ति करने आते हैं और वह अपने हिसाब से जांच पड़ताल कर फाइल को बंद कर देते हैं जबकि मंडीदीप क्षेत्र में बड़े पैमाने पर लकड़ी माफिया सक्रिय है सूत्रों ने जानकारी देते हुए यह भी बताया गोहरगंज स्थित कुछ व्यक्ति हैं जो बगैर किसी भी परमिशन के लकड़ी आरा मशीन तक पहुंचाते हैं बताया यह भी जा रहा है गोहरगंज के जंगलों से अबैध लकड़ियों को काट कर इन आरा मशीनों पर भारी पैमाने पर भेजा जा रहा है इतना ही नहीं गोहरगंज के कुछ व्यक्तियों द्वारा उस क्षेत्र में जितने भी ढाबे संचालित हैं सभी ढाबों पर लकड़ी के गिट्टे तंदूर में जलाने के लिए भी भेजे जाते हैं जबकि शासन द्वारा लकड़ी के तंदूर ऊपर प्रतिबंध लगाया गया है बावजूद इसके इन आरा मशीनों और लकड़ी माफियाओं द्वारा गिट्टे भारी पैमाने पर भेजे जा रहे हैं।

मस्त रहो मस्ती में आग लगे बस्ती मैं, की तर्ज पर भोपाल संभाग का उड़नदस्ता कई महीनों से मस्ती में आराम फरमा रहा है, इन जिलों में डिवीजन के वन कर्मी अपने हिसाब से आरा मशीन पर कृपा बनाए रखे हैं सैकड़ों टन लकड़ी स्टॉक है, कितनी टीपी का है कितना बगैर टीवी का है कौन-कौन सी परमिशन का है आखिर इसकी जांच कौन करेगा इन सभी जिलों के उड़नदस्ता प्रभारियों का अपने हिसाब से काम चल रहा है मगर संभागीय उड़नदस्ता सीसीएफ भोपाल का उड़नदस्ता कई महीनों से आराम में लगा है और कितने महीने आराम करेगा यह गंभीर विषय है जब तक सीसीएफ उड़नदस्ता की नींद खुलेगी तब तक हरे भरे पेड़ कट कर स्वाहा हो जाएंगे और प्रदेश के मुख्यमंत्री का पर्यावरण का प्रेम भी धरा का धरा रह जाएगा।




