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पाकिस्‍तान में पल रहे आतंकवाद की ढाल बनता चीन, ड्रैगन का दोगलापन बना पूरी दुनिया के लिए बड़ा खतरा

बीजिंग: पिछले दिनों दक्षिण अफ्रीका के शहर केपटाउन से भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आतंकवाद को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए प्रमुख खतरा बताया। जयशंकर ने यह बात ब्रिक्‍स देशों के विदेश मंत्रियों के सम्‍मेलन में कही। जयशंकर ने अपने संबोधन में पाकिस्‍तान पर तो हमला बोला ही साथ ही साथ ब्रिक्‍स के महत्‍वपूर्ण देश चीन को भी साफ संदेश दिया। जयशंकर ने आतंकवाद को हो रही फंडिंग के खिलाफ कड़े कदम उठाने की बात की। साथ ही साथ उन्‍होंने कहीं न कहीं चीन को भी एक संदेश दिया था। विशेषज्ञों की मानें तो पाकिस्‍तान समर्थित आतंकवाद को लेकर चीन का रवैया दोगलेपन से भरा हुआ है। साथ ही उसकी मंशा ब्रिक्स के उस वादे को पूरा करने में भी मुश्किलें पैदा करती है जो आतंकवाद को खत्‍म करने से जुड़ा है।

पाकिस्‍तान में मौजूद आतंकी

हाल के कुछ सालों में चीन ने हर बार उस आतंकी को ब्‍लैकलिस्‍ट करने वाले फैसले पर रोड़ा अटकाया है जो पाकिस्‍तान में मौजूद है। चीन, पाकिस्‍तान का सदाबहार दोस्त है। भारत के विदेश मंत्री जयशंकर ने कई बार पाकिस्तान को ‘आतंकवाद का केंद्र’ कह चुके हैं। यहां हाफिज सईद, मसूद अजहर, साजिद मीर और दाऊद इब्राहिम जैसे आतंकवादियों ने पनाह ली है।

ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के पांच देशों के समूह वाले ब्रिक्स के विदेश मंत्रियों ने सम्‍मेलन के बाद ‘द केप ऑफ गुड होप’ टाइटल के साथ एक ज्‍वॉइन्‍ट स्‍टेटमेंट जारी किया था। इसमें ‘जब भी, कहीं भी और इसे अंजाम देने वाले भी आतंकवाद की कड़ी निंदा करे’, यह बात कही गई थी।

चीन से ईमानदारी की उम्‍मीद!
इस पर साइन करने वाले सभी देश आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिसमें आतंकवादियों के सीमा पार आंदोलन, और आतंकवाद-वित्तपोषण नेटवर्क और सुरक्षित ठिकाने शामिल हैं। बयान में पाकिस्तान का साफ तौर पर जिक्र तो नहीं किया गया लेकिन इसे ब्रिक्स के मंच पर भारत की के लिए एक कूटनीतिक जीत थी। मगर जो रिकॉर्ड चीन का है उसके बाद तो यह वादा खोखला ही नजर आता है। लेकिन ब्रिक्स बैठक में जयशंकर ने अपने संबोधन में चीन पर स्‍पष्‍ट तौर पर हमला बोला। उन्होंने कहा, ‘दो दशकों से हमने बहुपक्षीय संस्‍थानों सुधार की मांग सुनी है। लेकिन हमें लगातार निराशा ही हाथ लगी है। इसलिए, यह जरूरी है कि ब्रिक्स सदस्य संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद समेत सभी वैश्विक फैसलों में सुधार के लिए ईमानदारी का प्रदर्शन करें।’

आतंकियों का मददगार चीन
चीन कई बार यूनाइटेड नेशंस में प्रतिबंधित होने वाले पाकिस्‍तानी आतंकियों से जुड़े प्रस्‍ताव में रोड़ा अटका चुका है। अक्‍टूबर 2022 को उसने ऐसे ही एक प्रस्‍ताव को अटकाया था जिसमें लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी शाहिद महमूद को वैश्विक आतंकवादी घोषित किया जाना था। चार महीने में चौथी बार था जब चीन ने यूएन के मंच पर आतंकियों को ब्लैकलिस्ट करने की कोशिशों में रोड़ा अटकाया था। चीन की मदद से ही पाकिस्‍तान फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की ग्रे लिस्‍ट से बाहर निकाला था।

चीन को भी मिलेगा धोखा?
चीन से मिलती शह पर सदाबहार दोस्त पाकिस्तान का भी जोश बढ़ता जा रहा है। वह अब इस बात को मानने से ही इनकार कर देता है कि उसके देश में 26/11 जैसे हमलों को अंजाम देने वाला खतरनाक आतंकी साजिद मीर मौजूद है। वहीं विशेषज्ञ मानते हैं कि चीन का यह रवैया और आतंकवाद पर दोहरे मापदंड उस पर ही भारी पड़ रहे हैं। पाकिस्‍तान में ही अब चीनी नागरिकों को निशाना बनाया जाने लगा है।

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